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ग्वालियर. दादा-परदादा का जीवन जिस घर में बीत गया, जिस आंगन में तीन-चार पीढिय़ां बड़ी हो गईं, पर उस घर पर ग्रामीण का हक नहीं था! सुनकर झटका लग सकता है, लेकिन जिले के ग्रामीण क्षेत्रों की यही कड़वी हकीकत थी। चूंकि गांव की जमीनें नजूल आबादी के तहत दर्ज थीं, इसलिए तकनीकी रूप से ग्रामीण सरकारी जमीन पर बसे हुए थे, लेकिन जमीन पर हक सरकार का था। अब बरसों पुराना दर्द दूर होने जा रहा है। स्वामित्व योजना के तहत अब ग्रामीणों को उनके आशियाने का असली मालिकाना हक मिलने जा रहा है।
जिले में इस योजना का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। अब तक जिले के 496 में से 418 गांवों का सर्वे कार्य पूरी तरह से कंप्लीट हो चुका है। इस सर्वे के बाद जिले के 86 हजार 698 घरों की जमीन पूरी तरह से निजी (स्वामित्व वाली) हो जाएगी। दरअसल स्वामित्व योजना के तहत राज्य सरकार रजिस्ट्री कराएगी। बीते दिनों हुई कैबिनेट की बैठक में इसका प्रस्ताव पास किया गया है।
418 गांव का सर्वे पूरा हो गया है, शेष गांव का सर्वे जारी है। ग्रामीण को गांव में जमीन पर मालिकाना हक मिल रहा है। इससे लोन भी ले सकते हैं। विवाद भी खत्म होंगे।
मुन्ना ङ्क्षसह गुर्जर, अधीक्षक भू अभिलेख
Published on:
06 Jun 2026 06:17 pm
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