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ग्वालियर-चंबल में घुट रहा बेटियों का दम, लालच में उजड़ रहे संसार

नोएडा की दो बेटियों ट्विशा शर्मा और दीपिका नागर के केस ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। दहेज के लिए महिलाओं को प्रताड़ित करने के मामले थम नहीं रहे हैं। हालांकि सरकार ने महिला अपराधों को रोकने कानून को कसा भी है। फिर भी ग्वालियर-चंबल अंचल में तस्वीर चिंताजनक है।

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प्रदेश में घरेलू हिंसा

ग्वालियर. नोएडा की दो बेटियों ट्विशा शर्मा और दीपिका नागर के केस ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। दहेज के लिए महिलाओं को प्रताड़ित करने के मामले थम नहीं रहे हैं। हालांकि सरकार ने महिला अपराधों को रोकने कानून को कसा भी है। फिर भी ग्वालियर-चंबल अंचल में तस्वीर चिंताजनक है। नेशनल क्राइम रेकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की हालिया रिपोर्ट बताती है कि दहेज के लिए महिलाओं को जान से मारने में मुरैना और घरेलू हिंसा में ग्वालियर प्रदेश में सबसे आगे है। इन केसों की स्टडी से एक बात और सामने आई है कि अगर लड़का सरकारी सेवा में है तो उसकी बोली लगना आम बात है। लड़के वाले मुंह मांगा दहेज मांगते हैं।

दहेज हत्या के मामले
-मार्च 2024:
जौरा के खिटोरा गांव में नव विवाहिता ज्योति को दहेज के लिए जिंदा जलाने की दहलाने वाली वारदात
सामने आई।
-जनवरी 2025: सबलगढ़ के रहू गांव में अंजू शर्मा को दहेज के लिए ससुराल में पीटने और कुएं में फेंकने की सनसनीखेज वारदात।

पैसा, गाड़ी और गहने का चलन
मुरैना में दहेज के लिए 25 महिलाओं की हत्या हुई है। पुलिस कहती है दहेज के लिए महिलाओं की जान लेने या उन्हें सुसाइड के लिए मजबूर करने के पीछे दहेज में कार, गहना और पैसे का लालच है।

दहेज के लिए हत्या
शहर दहेज हत्या प्रकरण
मुरैना 25
रीवा 23
सतना 23
भिंड 20
छतरपुर 21
ग्वालियर 19
सागर 18
प्रदेश में दहेज हत्या के 450 केस दर्ज हुए हैं। इनमें मुरैना पहले पायदान, भिंड चौथे और ग्वालियर 6वें नंबर पर है।

घरेलू हिंसा के मामले
शहर घरेलू हिंसा प्रकरण
ग्वालियर 582
भोपाल 501
इंदौर 474
सागर 413
जबलपुर 264
एनसीआरबी की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में घरेलू हिंसा के 7514 अपराध दर्ज हुए है।

एक्सपर्ट व्यू
दहेज के लिए अपराधों में इजाफा चिंता की बात है। इस पर पूरी तरह लगाम कसना पुलिस और कानून के लिए मुश्किल है। दहेज के लेन-देन पर लगाम कसने के लिए वर और कन्या दोनों पक्ष को आगे आने होगा केवल बातों में इस पर लगाम नहीं कसेगी। दहेज का चलन बढ़ने की बड़ी वजह सरकारी नौकरी वाले दूल्हों की डिमांड है। ऐसे युवकों से शादी करने के लिए कन्या पक्ष के लोग हैसियत से ज्यादा दहेज देने की बात करते हैं शादी तय होने पर दहेज में कमी होने पर विवाद की स्थिति बनती है। दहेज पर लगाम के लिए दोनों पक्षों को संकल्प लेना होगा कि वह न दहेज लेंगे और न देंगे। तब जाकर दहेज के चलन और उसकी वजह होने से वाले अपराधों पर लगाम कसेगी।

-दीपक भार्गव, रिटायर्ड सीएसपी