क्षमता से डेढ़ गुना भर्ती, उमस में जूझ रहे मासूम; गंभीर वार्ड में कूलिंग व्यवस्था फेल, बढ़ते मरीजों से सिस्टम पर दबाव
क्षमता से डेढ़ गुना भर्ती, उमस में जूझ रहे मासूम; गंभीर वार्ड में कूलिंग व्यवस्था फेल, बढ़ते मरीजों से सिस्टम पर दबाव
ग्वालियर. भीषण गर्मी ने बच्चों की सेहत पर गंभीर असर डाला है और इसका सबसे चिंताजनक दृश्य कमला राजा अस्पताल (केआरएच) में देखने को मिल रहा है। यहां इलाज के लिए आए मासूमों को राहत की बजाय उमस और अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल के पीडियाट्रिक वार्ड में क्षमता से कहीं ज्यादा बच्चों को भर्ती किया गया है, जिससे हालात बेकाबू हो गए हैं।
अस्पताल में कुल 170 बेड स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में 250 से अधिक बच्चे भर्ती हैं। भीड़ इतनी ज्यादा है कि एक ही बेड पर दो-दो बच्चों का इलाज किया जा रहा है। ग्वालियर के अलावा भिंड, मुरैना, शिवपुरी और दतिया जैसे आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में मरीज यहां पहुंच रहे हैं। जगह की कमी के कारण वार्ड ही नहीं, गैलरी तक में मरीजों को लिटाना पड़ रहा है।
स्थिति और गंभीर तब हो जाती है जब पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (PICU) की बात आती है। यहां 16 बेड पर भर्ती गंभीर बच्चों के लिए एयर कंडीशनर कई दिनों से खराब पड़ा है। एसी पर “खराब है, चालू न करें” का नोटिस चिपका दिया गया है। गर्मी और उमस के बीच पंखे भी राहत देने में नाकाम साबित हो रहे हैं। परिजनों का कहना है कि दोपहर के समय बच्चों को सांस लेने में तकलीफ तक होने लगती है, जिससे उनकी हालत और बिगड़ सकती है।
डॉक्टरों के अनुसार, तापमान बढ़ने के साथ उल्टी-दस्त, डिहाइड्रेशन और लू के मामलों में तेजी आई है। मरीजों का दबाव इतना अधिक है कि संसाधन कम पड़ रहे हैं और अस्पताल प्रबंधन के सामने व्यवस्था बनाए रखना चुनौती बन गया है। पीडियाट्रिक्स विभाग के एचओडी डॉ. अजय गौड़ का कहना है कि मरीजों की संख्या अचानक बढ़ने से यह स्थिति बनी है और PICU के एसी की खराबी की सूचना प्रबंधन को दे दी गई है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों ने अभिभावकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। बच्चों को पर्याप्त तरल पदार्थ और ओआरएस देना जरूरी है, दोपहर 12 से 4 बजे के बीच धूप में बाहर न ले जाएं, बासी भोजन से बचें और यदि बच्चा सुस्त दिखे या लगातार उल्टी-दस्त हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
पत्रिका व्यू:
अस्पताल प्रबंधन का सिर्फ नोटिस चिपकाकर जिम्मेदारी से बचना गंभीर सवाल खड़े करता है। 42-45 डिग्री तापमान में गंभीर बच्चों के वार्ड में एसी का बंद होना साफ लापरवाही है। प्रशासन को चाहिए कि जल्द से जल्द एसी की मरम्मत कराई जाए और अतिरिक्त बेड व कूलिंग व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि मासूमों को राहत मिल सके।