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महिला की जांच रिपोर्ट देख कर दिया पुरुष का इलाज, मौत, लापरवाही के खिलाफ बेटी ने खोला मोर्चा

Gwalior News: ग्वालियर के सबसे बड़े जया आरोग्य अस्पताल का मामला, डॉक्टर्स की गंभीर लापरवाही से मरीज की मौत
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ग्वालियर

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Sanjana Kumar

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Updated: 22 Apr 2026, 9:50 AM IST

Gwalior News daughter in pain

Gwalior News: बेटी रागिनी जाधव (इनसेट): (photo: patrika)

Gwalior News: अंचल के सबसे बड़े जया आरोग्य अस्पताल (जेएएच) में बड़ी लापरवाही सामने आई है। पुरुष मरीज का इलाज किसी महिला की मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर कर दिया गया। गलत रिपोर्ट और गलत इलाज से मरीज की मौत हो गई।

यह आरोप लगाते हुए मरीज की बेटी ने गजराराजा मेडिकल कॉलेज डीन से शिकायत कर जांच की मांग की है। पीड़ित परिवार को मदद देने भी बात कही। गुढ़ा की रागिनी जाधव ने डीन डॉ. आरकेएस धाकड़ से शिकायत की है।

घबराहट होने पर पिता को कराया था भर्ती

पिता दिलीप राव को घबराहट होने पर 18 अप्रेल को रागिनी जाधव ने दोपहर 2.30 बजे जेएएच में भर्ती कराया था। अस्पताल की लैब से मिली रिपोर्ट में दिलीप के बजाय पुष्पा नामक महिला का नाम था। परिजन ने दावा किया, डॉक्टरों ने इसे नजरअंदाज कर इसी रिपोर्ट के आधार पर इलाज कर दिया।

डीन डॉ. आरकेएस धाकड़ कहा, मामला गंभीर है। रिपोर्ट पर नाम गलत होने के बाद इलाज कैसे किया गया। जांच के लिए समिति बनेगी। दोषी पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।

तो पिता जीवित होते

रागिनी का आरोप है, गलत रिपोर्ट के आधार पर दी गई दवाइयों से पिता की हालत सुधरने के बजाय बिगड़ती गई। अंतत: मृत्यु हो गई। बाद में डॉक्टरों ने हार्ट अटैक बताकर पल्ला झाड़ लिया। पीड़िता का कहना है, यदि लैब टेक्नीशियन और डॉक्टर अपनी जिम्मेदारी समझते, तो पिता जीवित होते।

हजार बिस्तर अस्पताल: हजारों की भीड़… एक वाटर कूलर और 42 डिग्री का सितम, पंखों के भरोसे मरीज

ग्वालियर. सूरज की तपिश बढऩे के साथ ही अंचल के सबसे बड़े हजार बिस्तर अस्पताल की व्यवस्थाएं गड़बड़ाने लगी हैं। पारा 42 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, लेकिन अस्पताल में भर्ती मरीजों को राहत देने के इंतजाम शून्य नजर आ रहे हैं। भीषण गर्मी के इस दौर में मरीज और उनके परिजन धीमी गति से चल रहे पंखों के भरोसे दिन काटने को मजबूर हैं।

विडंबना देखिए, जिस मेडिसिन विभाग में सबसे ज्यादा मरीज भर्ती हैं, वहां अब तक कूलर लगाने की सुध भी नहीं ली गई है। अस्पताल की ऊपरी मंजिलों पर भर्ती मरीजों की हालत और भी खराब है। वहां न केवल सीधी धूप का असर है, बल्कि कमरों में वेंटिलेशन की कमी और धीमी रफ्तार वाले पंखे गर्मी को और बढ़ा रहे हैं। मेडिसिन वार्ड में भर्ती मरीजों के परिजनों का कहना है कि रात भर गर्मी के कारण मरीज सो नहीं पाते। अस्पताल प्रबंधन की ओर से कूलर न लगाए जाने के कारण लोग अपने घरों से छोटे पंखे लाने को मजबूर हैं।

5000 लोगों के लिए सिर्फ एक सहारा

पानी जैसी सुविधा के लिए भी अस्पताल' दानदाताओं के भरोसे है। अस्पताल में रोजाना करीब 3500 ओपीडी मरीज और 1000 से ज्यादा भर्ती मरीजों के साथ उनके परिजन (कुल करीब 5000 लोग) पहुंचते हैं। अस्पताल के मुख्य गेट पर तीन संस्थाओं ने वाटर कूलर लगवाए थे, लेकिन उनमें से दो खराब पड़े हैं। अब महज एक वाटर कूलर से पूरे अस्पताल की प्यास बुझ रही है। मरीज और उनके परिजन कतार में लगकर पानी भरते हैं और फिर उसे लेकर सातवीं मंजिल तक की चढ़ाई चढ़ते हैं।

हजार बिस्तर

अस्पताल के वार्डों में कूलर लगाने का काम शुरू कर दिया गया है। शेष वार्डों में भी जल्द ही इन्हें चालू कर दिया जाएगा। पीने के पानी के लिए खराब पड़े कूलरों को ठीक कराने के लिए संबंधित दानदाताओं से बात की जा रही है। यदि वे जल्द कदम नहीं उठाते हैं, तो अस्पताल प्रबंधन स्वयं अपने खर्च पर इन्हें दुरुस्त कराएगा।

-डॉ. मनीष चतुर्वेदी, प्रवक्ता, जीआरएमसी