
Digital Betting
ग्वालियर. ऑनलाइन गेमिंग और फैंटेसी ऐप्स की आड़ में शहर में डिजिटल सट्टे का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है। साइबर सेल की जांच में सामने आया है कि इस अवैध कारोबार में रोजाना डेढ़ से दो करोड़ रुपए तक का दांव लगाया जा रहा है। हाल ही में शिवनगर (मोतीझील) में पकड़े गए हाईटेक सट्टा सेंटर से जुड़े आरोपियों ने खुलासा किया है कि अब सट्टा कारोबार पारंपरिक तरीके से नहीं, बल्कि डिजिटल नेटवर्क और एल्गोरिदम के आधार पर संचालित हो रहा है।
जांच में सामने आया कि सटोरिए शुरुआत में खिलाडिय़ों को छोटे दांव जिताकर उन्हें ‘आसान कमाई’ का लालच देते हैं। इसके बाद यूजर बड़े दांव लगाने लगते हैं और फिर तकनीकी सेटअप के जरिए उनकी रकम डुबो दी जाती है। इस जाल में कॉलेज छात्र, बेरोजगार युवा, नौकरीपेशा और छोटे कारोबारी सबसे ज्यादा फंस रहे हैं। कई लोग तो कर्ज लेकर भी ऑनलाइन दांव लगा रहे हैं।
साइबर सेल के अनुसार सट्टे की काली कमाई को खपाने के लिए म्यूल खातों और क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल किया जा रहा है। बेरोजगार और गरीब तबके के लोगों को 10-10 हजार रुपए देकर उनके बैंक खाते खरीदे जाते हैं। इन्हीं खातों के जरिए करोड़ों रुपए का लेनदेन किया जा रहा है।
18 से 25 वर्ष के युवा जल्दी पैसा कमाने के लालच में सबसे ज्यादा फंस रहे हैं। वहीं नाबालिग भी फर्जी आईडी और डिजिटल वॉलेट बनाकर इस अवैध नेटवर्क से जुड़ रहे हैं।
सटोरिए टेलीग्राम और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म पर निजी ग्रुप बनाकर लोगों को जोड़ते हैं। यूजर्स को एपीके फाइल और फर्जी वेबसाइट के लिंक भेजे जाते हैं, जिनमें क्रिकेट बेटिंग, कैसीनो, कार्ड गेम, रंग-पत्ती और नंबर गेम चलाए जाते हैं। शुरुआत में यूजर को जीत का भरोसा दिलाया जाता है, लेकिन बाद में मोटी रकम डुबो दी जाती है।
आरोपियों से पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। संदिग्ध बैंक खातों की डिटेल जुटाई जा रही है और जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
धर्मेन्द्र कुशवाह, निरीक्षक, साइबर सेल
Published on:
08 Jun 2026 06:29 pm
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