
हाईकोर्ट की युगल पीठ ने एक परिवार को टूटने से बचाने के लिए अनूठी पहल की थी। कोर्ट ने पति के पैर छूकर उसके साथ रहने के लिए भेजा, ताकि दोनों साथ में रहकर आपसी तालमेल से विवाद को खत्म कर सकें, लेकिन दो महीने बाद फिर सोमवार को दोनों न्यायालय के सामने आए। उनके बीच सुलह नहीं हो सकी।
पति ने कहा कि पत्नी घर का ताला लगाकर चली गई थी। पत्नी साथ रहना नहीं चाहती है। इसके बाद कोर्ट ने दोनों बच्चों से राय जानी कि वह किसके साथ रहना चाहते हैं। बच्चों ने मां के साथ जाने की सहमति दी। कोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का निराकरण कर दिया। प्रिया (परिवर्तित नाम) ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की। उसकी ओर से कहा गया कि उसके पति, ससुराल वालों ने बच्चों को बंधक बना लिया है। 13 जून 2023 को अपने साथ जबरन ले गए थे। पति से विवाद के बाद से मायके में रह रही हूं। पति सीआइएसएफ में कार्यरत हैं। उसके अन्य महिलाओं से संबंध हैं। शराब पीने के बाद घर में हंगामा करता था, जिससे बच्चों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा था। पति की सीआइएसएफ में अलग-अलग जगह पोस्टिंग होती है, जिससे वह बच्चों का ध्यान नहीं रख सकती है। पति ने आरोप लगाया था कि पत्नी परिवार वालों से अच्छा व्यवहार नहीं करती है। वह काफी समय से ससुराल में नहीं रह रही है।
कोर्ट ने समझाकर दिया था एक होने का मौका
कोर्ट ने दोनों को समझाने के बाद पति के पैर छूने को कहा। पत्नी ने पैर छुए थे। गले लगाकर पति पत्नी को 5 दिसंबर 2023 को अपने साथ ले गया था। कोर्ट ने कहा था कि अपने सास-ससुर की सेवा करेगी। विवाद को खत्म करेगी। दोनों फिर से न्यायालय में उपस्थित हुए। दोनों में सुलह नहीं हो सकी। बच्चों को पत्नी के सुपुर्द कर दिया। क्योंकि बच्चों ने मां के साथ जाने की सहमति दी थी।