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44 डिग्री तापमान में बढ़ा ‘सनबर्न’ का खतरा, बचने के लिए करें ये 8 काम

MP News: पराबैंगनी किरणों के संपर्क में त्वचा आते ही लालिमा होने लगती है। त्वचा पर धब्बे बनने लगते हैं। जहां तक शरीर के अंग खुले हुए हैं, काले अथवा लाल दिखने लगते हैं।

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Sunburn Rises

Sunburn Rises प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- freepik)

MP News: शहर में नौतपा से पहले ही सूरज के तेवर तल्ख हो गए हैं। पारा 42 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचने के साथ ही अब स्किन डैमेज का खतरा बढ़ गया है। भीषण गर्मी में केवल सनस्क्रीन लगाना काफी नहीं है, बल्कि अब आपकी त्वचा को अंदरूनी पोषण और एंटीऑक्सीडेंट्स की भी जरूरत है। सूरज की हानिकारक यूवी और आइआर किरणें सीधे त्वचा को निशाना बना रही हैं, जिससे सनबर्न, जलन और दर्द जैसी गंभीर समस्याएं पैदा हो रही हैं। हालांकि सनबर्न से बचने का सबसे अच्छा तरीका धूप से दूर रहना है, लेकिन अधिकांश लोगों के लिए ऐसा संभव नहीं हो पाता।

जानें क्या है सनबर्न की समस्या

तापमान बढऩे के साथ ही सनबर्न का खतरा उत्पन्न हो जाता है। सनबर्न के शिकार लोगों की त्वचा लाल सूखी हुई हो जाती है। इससे त्वचा में दर्द भी होने लगता है। दरअसल यह सीधे सूर्य की पराबैंगनी किरणों के संपर्क में आ जाती हैं। पराबैंगनी किरणों के संपर्क में त्वचा आते ही लालिमा होने लगती है। त्वचा पर धब्बे बनने लगते हैं। जहां तक शरीर के अंग खुले हुए हैं, काले अथवा लाल दिखने लगते हैं। आगे चलकर यह पूरे शरीर में डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण) पैदा कर देता है। ऐसी स्थिति में मरीजों को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है।

गर्मी में आने वाली परेशानियां

-शरीर में पानी की कमी से स्किन पर झुर्रियां आ जाती हैं।
-गर्मी से स्किन ड्रॉइ होने लगती है और कभी-कभी ये लाल भी होने लगती है।
-गर्मी और पसीने से फंगल/बैक्टीरियल इंफेक्शन की समस्या होने लगती है।
-चेहरे पर निशान यानी स्किन पिगमेंटेशन की समस्या भी बनने लगती है।

बचाव के उपाय

-पूरी आस्तीन के कपड़े पहनकर निकलें घर से बाहर निकलने से पहले 30 एसपीएफ वाला सनस्क्रीन लगाएं।

-यदि लगातार बाहर रहना है तो इसे हर तीन घंटे बाद लगाना चाहिए।

-पूरी आस्तीन, कॉटन के लूज कपड़े पहनें। सिर को टोपी या दुपट्टे से ढंके।

-सुबह 11 से 4 बजे के बीच, जब धूप तेज हो तो बाहर निकलने से बचें।

-आंखों को बचाने के लिए अच्छी गुणवत्ता वाला सनग्लास पहनें।

-पानी अधिक से अधिक पीना चाहिए और तरल पदार्थों का उपयोग किया जाना चाहिए। जैसे नारियल पानी व फ्रूट ज्यूस आदि।

-एंटीऑक्सीडेंट्स का इस्तेमाल करना चाहिए जैसे पपीता, टमाटर, आम आदि।

-घरेलु नुस्खों में मुल्तानी मिट्टी, चंदन और गुलाब जल का उपयोग किया जा सकता है। एलोवेरा और बर्फ की सिकाई भी राहत प्रदान कर सकती है।