Municipal Council President Elections: कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता जनवरी 2026 में कोर्ट आए, जबकि मामला 2020 का था। इतने लंबे समय तक सोए रहने वाले याचिकाकर्ता विवेकाधीन राहत का हकदार नहीं हैं।
MP news: मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के डबरा नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष के चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका को हाईकोर्ट ने ख़ारिज कर दिया है। कोर्ट की एकल बेंच ने 'देरी' के आधार पर याचिका को खारिज किया है। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता जनवरी 2026 में कोर्ट आए, जबकि मामला 2020 का था। इतने लंबे समय तक सोए रहने वाले याचिकाकर्ता विवेकाधीन राहत का हकदार नहीं हैं। याचिकाकर्ताओं ने अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने के बजाय 6 साल तक इंतजार किया, जो कानून की नजर में उचित नहीं है।
पार्षद सत्येंद्र कुमार दुबे और एक अन्य ने याचिका दायर कर मांग की थी कि लक्ष्मी बाई के अध्यक्ष के निर्वाचन को शून्य घोषित किया जाए । नगर पालिका अध्यक्ष के चुनाव परिणाम की राजपत्र अधिसूचना 30 दिन में जारी नहीं होने से चुनाव शून्य माना जाए और अध्यक्ष का कार्यकाल अवैध घोषित किया जाए। इस आधार पर अध्यक्ष के निर्वाचन को चुनौती दी गई थी। हालांकि कोर्ट ने कहा कि कथित कारण 2020 में उत्पन्न हो गया था, लेकिन याचिकाकर्ता 2026 में अदालत पहुंचे, जबकि इतनी लंबी देरी का कोई संतोषजनक कारण नहीं बताया गया। अध्यक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एमपीएस रघुवंशी ने तर्क दिया कि याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।
बता दें कि ये मामला साल 2020 में हुए नगर पालिका अध्यक्ष के चुनाव का है। इस चुनाव के बाद नपा अध्यक्ष के पद लक्ष्मी बाई चुनाव जीती। इसके बाद लक्ष्मी के चुनाव को लेकर कुछ पार्षदों ने सवाल उठाया कि परिणाम की राजपत्र अधिसूचना निर्धारित 30 दिनों के अंदर जारी नहीं की गई। यह नियमों का उल्लंघन है। पार्षदों ने मांग की कि इस चुनाव को शून्य घोषित किया जाए। हालांकि, पार्षदों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाने में देरी कर दी। ये मामला कई सालों तक ठंडे बस्ते में रहा। (MP news)