ग्वालियर

हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी: नगर निगम की नजर में आम आदमी की जिंदगी का कोई महत्व नहीं, जानिए क्यों कहा ऐसा

कोर्ट ने तल्ख लहजे में उनसे कहा कि एक जिम्मेदार शासकीय संस्था झूठे शपथ पत्र प्रस्तुत कर रही है, ये बहुत ही सीरियस बात है। नगर निगम की नजर में आम आदमी के स्वास्थ्य एवं जिंदगी का कोई महत्व नहीं है।
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हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी: नगर निगम की नजर में आम आदमी की जिंदगी का कोई महत्व नहीं, जानिए क्यों कहा ऐसा

ग्वालियर। हाईकोर्ट में डेंगू, मलेरिया और स्वाइन फ्लू के संबंध में गलत जानकारी पेश किए जाने पर गुरुवार को स्पष्टीकरण देने के लिए पहुंचे नगर निगम आयुक्त संदीप माकिन ने बिना शर्त माफी मांगी। कोर्ट ने तल्ख लहजे में उनसे कहा कि एक जिम्मेदार शासकीय संस्था झूठे शपथ पत्र प्रस्तुत कर रही है, ये बहुत ही सीरियस बात है। नगर निगम की नजर में आम आदमी के स्वास्थ्य एवं जिंदगी का कोई महत्व नहीं है।

इस पर निगमायुक्त ने कोर्ट को बताया कि दोषी अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि लापरवाह और कामचोर कर्मचारियों के लिए निलंबन तो एक सुखद क्षण होता है। निलंबन की अवधि में वह सारी सुविधाओं के साथ बिजनेस भी करने लगते हैं। ऐसे कर्मचारियों को बर्खास्त कर अच्छे लोगों को नियुक्त किया जाना चाहिए, ताकि वह अच्छा काम करें।

न्यायमूर्ति संजय यादव और विवेक अग्रवाल की पीठ ने कमिश्नर से फॉगिंग मशीन की जानकारी मांगी तो कमिश्नर ने कहा कि अभी 25 मशीनें मौजूद हैं, जिनमें से सिर्फ 15 ही काम करती हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि ऐसा नहीं चलेगा। इसका मतलब चार-पांच वार्ड के ऊपर एक मशीन, यह तो नाकाफी है। कमिश्नर से कोर्ट ने कहा कि जल्द ही और मशीनों की व्यवस्था कर ली जाए। हाईकोर्ट ने कहा कि बिना भेदभाव प्रत्येक क्षेत्र में जल्द फॉङ्क्षगग की जाए और लार्वा खत्म करने के लिए दवाई का छिडक़ाव किया जाए, क्योंकि बारिश का मौसम शुरू हो चुका है।

इसलिए पेश हुए निगमायुक्त
अधिवक्ता अवधेश सिंह ने हाईकोर्ट में डेंगू व मलेरिया को लेकर एक जनहित याचिका दायर की है। जिसमें कहा गया है कि बारिश का मौसम आने पर शहर मौसमी बीमारियों की चपेट में आ जाता है। मलेरिया और डेंगू सबसे ज्यादा फैलता है। नगर निगम की कोई तैयारी नहीं दिख रही है। इस दिशा में कार्य करने के लिए निर्देश दिए जाएं। नगर निगम ने बीते दिनों पालन प्रतिवेदन रिपोर्ट पेश कर डेंगू, मलेरिया सहित मौसमी बीमारियों को रोकने के लिए किए गए प्रयासों की जानकारी दी थी। निगम ने तर्क दिया था कि मलेरिया विभाग ने करीब 200 संवेदनशील क्षेत्रों की सूची दी थी, उसके आधार पर दवा व फॉगिंग की जा रही है।

आठ डिजिट के मोबाइल नंबर देख जताई थी नाराजगी
मंगलवार को इस रिपोर्ट को कोर्ट ने पढ़ा। उन क्षेत्रों की सूची कोर्ट पढ़ रहा था, जहां पर दवा का छिडक़ाव किया और फॉगिंग की। रहवासियों के मोबाइल नंबर के साथ सूची पेश की गई थी। कोर्ट को 8 डिजिट के मोबाइल नंबर दिख तो आपत्ति की और कहा कि क्या 8 डिजिट का मोबाइल नंबर होता है। कोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट में कुछ गड़बड़ी दिख रही है, इसलिए आयुक्त को स्पष्टीकरण देने के लिए कोर्ट बुलाया गया।

कमिश्नर ने इन पर की कार्रवाई
कमिश्नर ने इस मामले में शरण कुमार उप स्वास्थ्य पर्यवेक्षक ग्वालियर विधानसभा, मोतीराम पाल भृत्य ग्वालियर पूर्व विधानसभा, वीरेंद्र करोसिया उप स्वास्थ्य पर्यवेक्षक ग्वालियर दक्षिण विधानसभा को काम में लापरवाही का दोषी पाते हुए निलंबित कर दिया है और उनके विरुद्ध जांच बैठा दी गई है। इसके अलावा गौरव सेन स्वच्छता निरीक्षक ग्वालियर विधानसभा, अजय सिंह ठाकुर स्वच्छता निरीक्षक दक्षिण विधानसभा, कृष्ण शर्मा स्वच्छता निरीक्षक विधानसभा ग्वालियर, किशोर चौहान ग्वालियर पूर्व विधानसभा, विष्णु कुमार पमनानी स्वच्छता निरीक्षक दक्षिण विधानसभा को कारण बताओ नोटिस देते हुए कहा है क्यों न उनकी दो वेतन वृद्धियां रोक दी जाएं।

Published on:
12 Jul 2019 07:20 am