हाईकोर्ट ने गुमशुदा इंसान की तलाश में जुटी पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। कोर्ट ने पाया कि पुलिस अधिकारी जांच के नाम पर सरकारी खर्चे पर अपने रिश्तेदारों के घर
ग्वालियर. हाईकोर्ट ने गुमशुदा इंसान की तलाश में जुटी पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। कोर्ट ने पाया कि पुलिस अधिकारी जांच के नाम पर सरकारी खर्चे पर अपने रिश्तेदारों के घर रुक रहे हैं और धार्मिक स्थलों की यात्रा कर रहे हैं। जांच अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग पीताम्बरा माई के मंदिर दर्शन की इच्छा पूरी करने के लिए कर रहे। कोर्ट ने इसे जनता के पैसे का दुरुपयोग माना क्योंकि पुलिसकर्मी ड्यूटी के नाम पर पेड लीव (सवेतन अवकाश) का आनंद ले रहे थे। जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस हिरदेश की पीठ ने केस डायरी का अवलोकन करने के बाद कहा कि पुलिस पार्टी जांच के बहाने अपने रिश्तेदारों के यहां जा रही है।
कोर्ट ने दो प्रमुख उदाहरण वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर ङ्क्षसह के समक्ष पेश किए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जांच की गुणवत्ता पर असंतोष जताते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) धर्मवीर ङ्क्षसह यादव को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में तलब किया। एसएसपी ने स्वीकार किया कि जांच में खामियां हैं और उन्होंने संबंधित जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है। कोर्ट ने यह नाराजगी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई में व्यक्ति की। याचिकाकर्ता ने बेटी को पीथमपुर में बंधक बनाए जाने का आरोप लगाया था।
सुनवाई के दौरान जब कोर्ट ने पूछा कि हेड कांस्टेबल ग्वालियर से इंदौर कैसे पहुंचा, तो जवाब मिला कि ’बस से’। लेकिन जब कोर्ट ने टिकट मांगा, तो पुलिस बगलें झांकने लगी । हैरानी की बात यह भी रही कि पांच दिन के सरकारी दौरे के बाद भी अब तक यात्रा भत्ते का क्लेम नहीं किया गया । कोर्ट ने कहा कि यह जांच नहीं, बल्कि सरकारी खर्चे पर निजी दायित्वों की पूर्ति है।
रोजनामचा (के अनुसार कांस्टेबल को इंदौर, खंडवा, उज्जैन, धार और ङ्क्षभड जाना था, वह कई जगहों पर गया ही नहीं, रिश्तेदार के घर में रहा।