ग्वालियर

Gwalior…पीएचडी की रफ्तार 2024 के बाद थमी, दो साल में आधे से ज्यादा शोधार्थी घटे

जीवाजी विश्वविद्यालय में शोध को लेकर तस्वीर पिछले कुछ वर्षों में लगातार बदल रही है। पीएचडी में 2024 में अचानक बड़ा उछाल आने के बाद अब शोधार्थियों की संख्या फिर तेजी से घट रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022 में विश्वविद्यालय से 50 शोधार्थियों ने पीएचडी की, 2023 में यह संख्या मामूली बढकऱ ...
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Updated: 10 Sep 2026, 5:53 PM IST
Jiwaji University Gwalior
Jiwaji University Gwalior

ग्वालियर. जीवाजी विश्वविद्यालय में शोध को लेकर तस्वीर पिछले कुछ वर्षों में लगातार बदल रही है। पीएचडी में 2024 में अचानक बड़ा उछाल आने के बाद अब शोधार्थियों की संख्या फिर तेजी से घट रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022 में विश्वविद्यालय से 50 शोधार्थियों ने पीएचडी की, 2023 में यह संख्या मामूली बढकऱ 51 हुई। वर्ष 2024 में आंकड़ा सीधे 227 तक पहुंच गया, लेकिन इसके बाद गिरावट शुरू हो गई। 2025 में 212 और 2026 में यह संख्या घटकर महज 125 रह गई। यानी दो साल में पीएचडी करने वाले शोधार्थियों की संख्या 102 कम हो गई।

पीएचडी के आंकड़ों की दूसरी तस्वीर विषयों की पसंद में भारी असमानता दिखाती है। वर्ष 2020-21 में उपलब्ध विषयवार आंकड़ों के अनुसार कुल 510 शोधार्थियों ने अलग-अलग विषयों में पीएचडी के लिए प्रवेश लिया। इनमें विधि और प्रबंधन सबसे आगे रहे। दोनों विषयों में 58-58 शोधार्थियों ने शोध पूरा किया। शिक्षा शास्त्र में 50, राजनीति विज्ञान में 45 और वाणिज्य में 42 शोधार्थियों ने पीएचडी की। हिंदी में 38, इतिहास में 33 और समाजशास्त्र में 23 शोधार्थी रहे।

कहीं 58 तो कहीं सिर्फ एक शोधार्थी

विषयों के बीच यह अंतर विज्ञान और तकनीक से जुड़े क्षेत्रों में और स्पष्ट दिखाई देता है। फूड टेक्नोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, आयुर्वेद, भू-विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान और विज्ञान शिक्षा में पूरे वर्ष में सिर्फ एक-एक शोधार्थी ने पीएचडी की। ज्योर्तिविज्ञान और उर्दू में दो-दो, जबकि पर्यावरण और मेडिकल में तीन-तीन शोधार्थी रहे।

विज्ञान वर्ग में गणित के 10, प्राणीशास्त्र और रसायनशास्त्र के 9-9 तथा भौतिकी के सात शोधार्थी रहे। जैव प्रौद्योगिकी और वनस्पति शास्त्र में चार-चार शोधार्थियों ने पीएचडी की। इससे स्पष्ट है कि विश्वविद्यालय में शोधार्थियों की पहली पसंद सामाजिक विज्ञान, मानविकी, वाणिज्य और प्रबंधन से जुड़े विषय बने हुए हैं।

पीएचडी का ग्राफ एक नजर में

  • 2022: 50 शोधार्थी
  • 2023: 51 शोधार्थी
  • 2024: 227 शोधार्थी
  • 2025: 212 शोधार्थी
  • 2026: 125 शोधार्थी

इसलिए कम हो रही पीएचडी

आंकड़े यह सवाल भी खड़ा करते हैं कि 2024 में पीएचडी की संख्या में इतनी बड़ी वृद्धि के बाद अगले दो वर्षों में लगातार गिरावट क्यों आई। साथ ही, कम शोधार्थी वाले विषयों में शोध के अवसर, गाइड की उपलब्धता और विद्यार्थियों की रुचि को लेकर विश्वविद्यालय स्तर पर समीक्षा की जरूरत दिखाई देती है।

Updated on:
10 Sep 2026, 5:53 PM IST
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