
Teacher Eligibility Test: शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source: AI Image)
Gwalior news: सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता को चुनौती देने वाली याचिका एमपी में ग्वालियर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने खारिज कर दी है। जस्टिस जीएस आहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता का मामला सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसले से पूरी तरह कवर होता है। ऐसे में उसे अलग से कोई राहत नहीं दी जा सकती। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के 29 मई 2026 के रिव्यू आदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि टीईटी हासिल करने की समय-सीमा दो साल से बढ़ाकर तीन साल कर दी गई है। अब संबंधित इन-सर्विस शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक टीईटी की योग्यता हासिल करनी होगी। बता दें, पहले परीक्षा पास करने की यह समय-सीमा 31 अगस्त 2027 थी।
याचिकाकर्ता राजेश मिश्रा ने मांग की थी कि आरटीई एक्ट की धारा 23(2) और उसके प्रावधान उन शिक्षकों पर पूर्वव्यापी रूप से लागू नहीं किए जाएं, जिनकी नियुक्ति टीईटी की अनिवार्यता लागू होने से पहले हुई थी। उन्होंने टीईटी पास नहीं करने के आधार पर सेवा से हटाने, अनिवार्य सेवानिवृत्ति या अन्य दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने की भी मांग की थी।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि टीईटी केवल पात्रता की औपचारिकता नहीं, बल्कि शिक्षक के रूप में नियुक्ति के लिए आवश्यक योग्यता है। शिक्षक पद पर नियुक्ति चाहने वाले व्यक्ति को टीईटी पास करना होगा। इसके बाद ही वह नियुक्ति के लिए पात्र माना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने पुराने शिक्षकों की परिस्थितियों को देखते हुए कुछ राहत भी दी है। जिन इन-सर्विस शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष से कम समय बचा है, वे टीईटी पास किए बिना सेवानिवृत्ति की आयु तक सेवा में रह सकते हैं। हालांकि, ऐसे शिक्षक टीईटी पास किए बिना पदोन्नति के लिए पात्र नहीं होंगे।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष से अधिक समय बचा है, उनके लिए निर्धारित अवधि में टीईटी पास करना अनिवार्य है। निर्धारित समय में योग्यता हासिल नहीं करने पर सेवा में बने रहने का अधिकार प्रभावित भी हो सकता है।
Updated on:
10 Sept 2026 07:35 am
Published on:
10 Sept 2026 07:35 am
