
भारतीय पासपोर्ट पर थाईलैंड भागे आरोपी
डबरा में 17 बांग्लादेशी घुसपैठियों के फर्जी पासपोर्ट बनाए जाने के मामले में चौंकाने बातें सामने आ रही हैं। इस खेल को सोची समझी साजिश से अंजाम दिया था।इसमें मास्टरमाइंड ने बौद्ध धर्म की आड़ को ढाल बनाया है साजिश की स्क्रिप्ट बीएसएफ अकादमी टेकनपुर से महज 8.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सिमरिया गांव में लिखी गई जिसने अब स्पेशल टॉस्क फोर्स (एसटीएफ) के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के भी कान खड़े कर दिए हैं। उनकी नजर में रीजनल पासपोर्ट ऑफिस , जिला विशेष शाखा (डीएसबी) और डबरा थाना पुलिस की कार्यप्रणाली सीधे तौर पर कटघरे में आ गई है। हैरानी की बात है कि इन सभी 17 बांग्लादेशियों ने अपने आवेदनं में खुद को सिमरिया गांव, सिमरिया टेकरी और बौद्ध विहार का निवासी बताया था और सभी आवेदनों में एक ही मोबाइल नंबर लिखा था फिर भी इन तीनों जांच एजेंसियों ने आंखें मूंदकर पासपोर्ट का वेरिफिकेशन कर दिया।
टेकरी और बुद्ध विहार पर लटके ताले, भंते भी गायब
फर्जी पासपोर्ट कांड का भंडाफोड़ होने के बाद सिमरिया टेकरी स्थित अंबेडकर पार्क और तथागत बुद्ध विहार के दरवाजों पर ताले लटक गए हैं। इनमें रहने वाले भंते (पुजारी) भी गायब हैं। गांव वालों की मानें तो जिन लोगों के नाम से फर्जी दस्तावेजों पर पासपोर्ट जारी हुए है वह बांग्लादेशी भगोडे हैं सबको इसकी जानकारी है। लेकिन अब मामले के तूल पकड़ा है तो लोग चुप्पी साध गए हैं।
20 दिन सिमरिया में रुका था रियाल चौधरी
फर्जी पासपोर्ट का मास्टरमाइंड रियाल चौधरी एसटीएफ की पूछताछ में खुलासा कर चुका है कि वह 20 दिनों तक सिमरिया गांव में रुका था उसने माधौनगर (जनकगंज) निवासी गुलाब राय गौतम और बनवार (चीनोर) निवासी गयाप्रसाद गौतम से मुलाकातेंं की थीं। यह दोनों भी सिमरिया मेंं अंबेडकर पार्क से जुड़े रहे हैं और फर्जी दस्तावेजों से पासपोर्ट बनवाने वालों के गारंटर बने थे।
उलझी पुलिस, क्लीयरेंस कैसे
फर्जी दस्तावेजों से 17 बांग्लादेशी घुसपैठियों के पासपोर्ट जारी होने में डबरा पुलिस की भूमिका सीधे तौर पर कटघरे में है। एसटीएफ में दर्ज एफआइआर के मुताबिक यह सभी दस्तावेज 2021-22 में बने थे। उस दौरान विनायक शुक्ला डबरा थाना टीआइ थे और जानकारी मुंशी का काम आरक्षक भूपेन्द्र गुर्जर के हवाले था। उस दौरान इन धुसपैठियों ने फर्जी आधार कार्ड, पेन कार्ड, मूल निवासी,अंक सूची और सभी आवेदन पर एक ही मोबाइर नंबर के जरिए पासपोर्ट के आवेदन किए थे। नियम के मुताबिक पुलिस क्लीयरेंस सार्टिफिकेट (पीसीसी) जारी करने से पहले इन दस्तावेजों की जांच और भौतिक सत्यापन करना था। लेकिन ऐसा नहीं किया गया और सभी आवेदन को सही बताकर पासपोर्ट जारी के लिए डीएसबी को भेज दिया।
डीएसबी की भूमिका
पासपोर्ट सेल से आवेदन जिला विशेष शाखा (डीएसबी) आता है यहां से थाने पर जांच और सत्यापन के लिए भेजा जाता है। थाने से आवेदन वेरीफाई कर डीएसबी वापस भेजा जाता है। लेकिन बीएसएफ अकादमी के इतने नजदीकी दायरे में विदेशी नागरिकों का फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 17 पर एक ही मोबाइल नंबर दर्ज होने की लापरवाही नहीं पकड़ी गई।
इंडियन पासपोर्ट पर थाईलैंड में आरोपी
फर्जी पासपोर्टकांड में एसटीएफ के वांटेड कई आरोपी कानूनी शिकंजे से बचने के लिए थाईलैंड भाग गए हैं। जो बचे हैं उनकी तलाश में एसटीएफ की टीम लगातार दबिश दे रही हैं। उधर मंगलवार को एसटीएफ ने ग्वालियर पुलिस से उन पुलिसकर्मियों के नाम मांगे हैं जिनकी भूमिका इस एपीसोड में संदिग्ध है। इसे लेकर पुलिस विभाग में हडकंप मचा है।
आरोपियों की गिरफ्तारी पर फोकस
फर्जी दस्तावेजों से पासपोर्ट बनवा चुके आरोपियों की तलाश में एसटीएफ की टीम लगातार दबिश दे रही है। इन आरोपियों को पकडऩे पर पूरा फोकस है। इनके हाथ में आने से इस रैकेट में शामिल नेटवर्क का खुलासा होगा।
राहुल कुमार लोढा डीआइजी एसटीएफ भोपाल
Updated on:
9 Sep 2026, 12:25 PM IST
Published on:
9 Sep 2026, 12:25 PM IST
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