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सागर हादसे के बाद जागा आबकारी विभाग, एक दिन में 41 प्रकरण फिर भी नहीं थमा अवैध शराब का कारोबार

इतनी बड़ी मात्रा में लहान का एक साथ मिलना आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। यदि अवैध शराब बनाने के लिए बड़ी मात्रा में कच्चा माल एकत्र किया जा रहा था तो इसकी भनक विभाग को पहले क्यों नहीं लगी? कार्रवाई के दौरान इतनी बड़ी बरामदगी यह भी बताती है कि अवैध शराब बनाने वाले ठिकानों पर कच्चे माल का पर्याप्त भंडारण किया जा रहा था।
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Excise Department's campaign against illicit liquor

विभाग ने 41 प्रकरण दर्ज कर 324.48 बल्क लीटर अवैध मदिरा और 12,795 किलो यानी करीब 12.8 टन महुआ लहान जब्त किया।

ग्वालियर. सागर में जहरीली शराब से मौतों के बाद आबकारी विभाग ने भले ही अवैध शराब के खिलाफ अभियान तेज कर दिया हो, लेकिन एक दिन की कार्रवाई में सामने आए आंकड़े ही इस कारोबार की गहरी जड़ों की कहानी बयां कर रहे हैं। 6 सितंबर को ग्वालियर संभाग के सभी आठ जिलों में एक साथ की गई कार्रवाई में विभाग ने 41 प्रकरण दर्ज कर 324.48 बल्क लीटर अवैध मदिरा और 12,795 किलो यानी करीब 12.8 टन महुआ लहान जब्त किया। सबसे चौंकाने वाली बरामदगी शिवपुरी में हुई, जहां अकेले 8,400 किलो महुआ लहान मिला। सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में शराब बनाने का कच्चा माल तैयार होने, जुटने और संबंधित ठिकानों तक पहुंचने तक निगरानी तंत्र कहां था? एक ही दिन में दर्ज 41 प्रकरणों में 37 मामले आबकारी अधिनियम की धारा 34(1), दो प्रकरण धारा 34(2) और दो प्रकरण धारा 49 के तहत दर्ज किए गए। कार्रवाई में 44.38 बल्क लीटर देशी शराब, 225 बल्क लीटर कच्ची हाथभट्टी शराब और 55.10 बल्क लीटर बीयर जब्त की गई। बरामद शराब में सबसे बड़ा हिस्सा कच्ची हाथभट्टी शराब का है। इससे संकेत मिलता है कि संभाग के ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में अवैध शराब बनाने का काम अब भी सक्रिय है।

12.79 टन लहान... आखिर किसके लिए जमा था?

महुआ लहान अवैध शराब निर्माण में इस्तेमाल होने वाला प्रमुख कच्चा माल है। एक ही दिन में करीब 12.8 टन लहान की बरामदगी सामान्य कार्रवाई से कहीं बड़ा आंकड़ा है। इसमें शिवपुरी में 8,400 किलो, श्योपुर में 1,150 किलो और दतिया में 1,000 किलो लहान जब्त किया गया। यानी इन तीन जिलों से ही 10.55 टन से ज्यादा लहान बरामद हुआ। इतनी बड़ी मात्रा में लहान का एक साथ मिलना आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। यदि अवैध शराब बनाने के लिए बड़ी मात्रा में कच्चा माल एकत्र किया जा रहा था तो इसकी भनक विभाग को पहले क्यों नहीं लगी? कार्रवाई के दौरान इतनी बड़ी बरामदगी यह भी बताती है कि अवैध शराब बनाने वाले ठिकानों पर कच्चे माल का पर्याप्त भंडारण किया जा रहा था।

ग्वालियर में भी सात प्रकरण

ग्वालियर जिले में भी अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई के दौरान सात प्रकरण दर्ज कर 76.30 बल्क लीटर मदिरा और 800 किलो महुआ लहान जब्त किया गया। एक ही दिन में सात मामलों का सामने आना बताता है कि शहर और उसके आसपास के क्षेत्रों में भी अवैध शराब का नेटवर्क पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। कार्रवाई के बावजूद यदि अलग-अलग स्थानों से लहान और कच्ची शराब मिल रही है तो नियमित निगरानी और कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

दतिया में सबसे ज्यादा प्रकरण

संभाग में सबसे ज्यादा नौ प्रकरण दतिया में दर्ज किए गए। यहां 119 बल्क लीटर कच्ची हाथभट्टी शराब और 1,000 किलो महुआ लहान जब्त किया गया। शिवपुरी में आठ प्रकरणों के साथ 8,400 किलो लहान और 25 बल्क लीटर शराब बरामद हुई। श्योपुर में 1,150 किलो लहान के साथ 21 लीटर शराब जब्त की गई। अन्य जिलों में भिंड से 22.50, अशोकनगर से 23.60, गुना से 27 और मुरैना से 10.08 बल्क लीटर मदिरा जब्त की गई।

कार्रवाई बढ़ी, लेकिन नेटवर्क पर सवाल कायम

सागर हादसे के बाद विभाग की सक्रियता जरूर बढ़ी है, लेकिन एक दिन में इतनी बड़ी मात्रा में लहान और कच्ची शराब का मिलना यह सवाल छोड़ जाता है कि कार्रवाई केवल ठिकानों तक सीमित है या अवैध शराब के पूरे नेटवर्क तक पहुंच रही है। असली चुनौती शराब बनाने वाले ठिकानों पर कार्रवाई के साथ कच्चे माल की आपूर्ति, भंडारण और वितरण की श्रृंखला को तोड़ने की है। जब तक इस नेटवर्क की जड़ तक कार्रवाई नहीं होगी, तब तक छिटपुट जब्ती और प्रकरण दर्ज करने से अवैध शराब के कारोबार पर पूरी तरह अंकुश लगाना मुश्किल रहेगा।