
जमीन की जाली रजिस्ट्री, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source: AI Image)
Gwalior news: 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में देश की रक्षा करते हुए प्राण न्योछावर करने वाले अमर शहीद की विधवा की जमीन पर डाका डालने वाले भू-माफिया सिंडिकेट को अदालत ने सबक सिखाया है। एमपी में ग्वालियर के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रदीप कुमार दुबे की अदालत ने शहीद सैनिक की विधवा के नाम पर फर्जी महिला खड़ी कर 8 बीघा जमीन की जाली रजिस्ट्री कराने वाले दो मुख्य आरोपियों को दोषी ठहराया है। अदालत ने फर्जी सजन देवी बनी अंगूरी जाटव और जमीन दलाल राकेश सिंह गुर्जर को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास और 3.10 लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, फरियादी राजेश कुमार गर्ग ने थाटीपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। जमीन दलाली का काम करने वाले राकेश सिंह गुर्जर ने उन्हें ग्राम बरौआ (नूराबाद) स्थित 8 बीघा कृषि भूमि बिक्री के लिए दिखाई थी, जो सजन देवी पत्नी स्व. विंदपाल सिंह के नाम दर्ज थी। दलाल राकेश ने अंगूरी जाटव नाम की महिला को फर्जी सजन देवी बनाकर राजेश गर्ग से मिलवाया और 24 दिसंबर 2016 को सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में 40 लाख रुपये में जमीन की रजिस्ट्री करा ली। बाद में जब राजेश मौके पर पहुंचे, तो ग्रामीणों ने खुलासा किया कि असली सजन देवी ने कोई जमीन बेची ही नहीं है।
मामले की सुनवाई के दौरान असली पीड़ित महिला सजन देवी ने अदालत के सामने अपना दुख बयां किया। उन्होंने बताया कि उनके पति भारतीय सेना में थे और 1971 के भारत-पाक युद्ध में शहीद हो गए थे। शासन ने उन्हें जीविकोपार्जन के लिए बरौआ में 8 बीघा जमीन पट्टे पर दी थी। सजन देवी ने अदालत को बताया कि वह स्नातक पढ़ी-लिखी हैं और हमेशा अपने दस्तखत करती हैं, जबकि जालसाजों ने सब-रजिस्ट्रार के सामने फर्जी महिला से कागजों पर अंगूठा लगवाया था।
अदालत ने सुनवाई और साक्ष्यों के आधार पर दलाल राकेश गुर्जर और फर्जी सजन देवी बनी अंगूरी जाटव को कूटचरित दस्तावेज तैयार करने व धोखाधड़ी का दोषी पाया। दोनों को 10-10 साल की कठोर जेल और 3.10-3.10 लाख जुर्माना ठोक दिया, जबकि मामले के 3 अन्य सह-आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया।
Updated on:
09 Sept 2026 02:19 pm
Published on:
09 Sept 2026 02:19 pm
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