इंदरगंज, नूरगंज, गोरखी, सिंकदर कंपू,दर्पण कॉलोनी, थाटीपुर, रामदास घाटी व लक्ष्मण तलैया जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में टंकियां पूरी क्षमता से नहीं भरी जा रहीं।
तापमान बढ़ते ही शहर में पेयजल संकट ने दस्तक दे दी है और नगर निगम के प्रतिदिन पानी सप्लाई के दावे जमीनी हकीकत के आगे ढहते नजर आ रहे हैं। इंदरगंज, नूरगंज, गोरखी, सिंकदर कंपू,दर्पण कॉलोनी, थाटीपुर, रामदास घाटी व लक्ष्मण तलैया जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में टंकियां पूरी क्षमता से नहीं भरी जा रहीं। नतीजा, इससे नलों में सुबह-सुबह पानी नहीं आने अथवा कम आने से पब्लिक में खासी नाराजगी है। सुबह-शाम पानी का इंतजार अब रोजमर्रा की मजबूरी बन चुका है। कई वार्डों में एक दिन छोडकऱ सप्लाई हो रही है, जबकि निगम रोजाना वितरण का दावा करता है। ऐसे में अब महापौर, सभापति, निगम और सीएम हेल्पलाइन पर शिकायतें भी तेजी से बढ़ रही है। लेकिन फिलहाल राहत के नाम पर सिफ्र आश्वासन ही मिल रहा है।
शहर की प्रमुख टंकियां कम भरने से सप्लाई चक्र गड़बड़ा गया है। जिन इलाकों को रोज पानी मिलना चाहिए, वहां वैकल्पिक दिनों में भी पर्याप्त पानी नहीं पहुंच रहा। हालात यह हैं कि कई परिवारों को बोरवेल और टैंकर पर निर्भर होना पड़ रहा है। वहीं कई लोग अपने निजी पैसे से टैंकर मंगवा रहे है।
कागजों में जलस्तर संतोषजनक दिख रहा है, लेकिन शहर तक पानी नहीं पहुंच पा रहा। अभी तिघरा डैम में 730 फीट पानी भरा हुआ है और डैम 52.72 प्रतिशत भरा हुआ है। वर्तमान में तिघरा से पानी की निकासी 11.75 एमसीएफटी से बढ़ाकर 12.50 एमसीएफटी कर दी गई है, इसके बावजूद शहर के कई हिस्सों में बूंद-बूंद के लिए जद्दोजहद जारी है।
अपर ककैटो डैम: क्षमता 370 मीटर, भरा 369 मीटर
ककैटो डैम:क्षमता 342.75 मीटर, भरा 340.05 मीटर
पेहसारी डैम: क्षमता 334.36 मीटर, भरा 332.01 मीटर
तिघरा डैम: क्षमता 739 फीट, भरा 730 फीट
सिर्फ शहर ही नहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में भी जलसंकट गहराने लगा है। इसके चलते पीएचई विभाग ने कई स्थानों पर बोरकूप खनन शुरू तो कर दिए गए हैं, लेकिन यह तात्कालिक उपाय है। दीर्घकालिक योजना के बिना हर साल यही संकट लौट आता है।
नगर निगम के वार्ड 1, 5, 7, 9, 11, 12, 15, 32, 33, 37, 38, 39, 40, 41, 42, 44, 45, 46, 47, 48, 49, 50, 51, 52, 53, 54, 55, 58, 59 इन वार्डों में एक दिन छोडकऱ पानी की सप्लाई हो रही है। ऐसे में यह लंबी सूची बताती है कि समस्या छिटपुट नहीं, शहरव्यापी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि टंकियों की मॉनिटरिंग, लीकेज कंट्रोल और वितरण शेड्यूल पर सख्ती नहीं होने से हालात बिगड़े हैं। रोज सप्लाई का दावा सिर्फ कागजों में है, जमीन पर नहीं। यदि अभी भी सुधार नहीं हुआ तो आने वाले समय में स्थिति और अधिक खराब हो जाएगी।
हर गर्मी में वही कहानी कम भरी टंकियां, अनियमित सप्लाई और टैंकरों की दौड़। जब तक वितरण तंत्र की खामियां नहीं सुधरतीं, सिर्फ बांधों का जलस्तर बढ़ाने से प्यास नहीं बुझेगी। अब जरूरत है कड़े एक्शन, पारदर्शी मॉनिटरिंग और जवाबदेही तय करने की वरना ग्वालियर की प्यास हर साल यूं ही सुर्खियां बनती रहेगी।
गर्मी में पानी सप्लाई के लिए सभी अफसरों को फील्ड में जाकर काम करने के लिए कहा गया है। जिन वार्डों में जलसंकट की स्थिति बनती है वहां भी टैंकर सहित अन्य से भी व्यवस्था बनाने के लिए है। यदि कही समस्या है तो उसमें सुधार करेंगे,पानी का संकट नहीं आने देंगे।
संघप्रिय आयुक्त नगर निगम