हनुमानगढ़. जिले में बीटी कॉटन की बिजाई की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। एक मई से इसकी बिजाई कार्य शुरू होने की उम्मीद है।
-बीटी बीज विक्रय की अनुमति, खेत तैयार करने में जुटे किसान
-कपास में गुलाबी सुंडी नियंत्रण को लेकर गर्मी में गहरी जुताई कर फसल चक्रअपनाने की सलाह
हनुमानगढ़. जिले में बीटी कॉटन की बिजाई की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। एक मई से इसकी बिजाई कार्य शुरू होने की उम्मीद है। इसे लेकर राज्य सरकार ने अब बीटी कॉटन के बीज विक्रय की अनुमति प्रदान कर दी है। हनुमानगढ़ जिले में सरकार ने 21 बीटी बीज उत्पादक कंपनियों की करीब पांच दर्जन हाइब्रिड किस्मों के बीज विक्रय की अनुमति प्रदान की है। कृषि विभाग की ओर से किसानों से जिले की मंडियों में स्थित कृषि आदान विक्रेताओं से ही बीज खरीदने की अपील की गई है। विभाग स्तर पर किसानों को खरीद के दौरान दुकानदारों से पक्का बिल लेने की सलाह दी गई है। निर्धारित दर से अधिक राशि वसूलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि औसतन जिले में हर वर्ष करीब दो लाख हेक्टैयर में कपास की बिजाई होती है। एक मई से बीस मई तक इसकी बिजाई का उपयुक्त समय माना जाता है। इस समय रबी फसलों की कटाई का कार्य अंतिम चरण में चल रहा है। जैसे-जैसे खेत खाली होंगे, खरीफ फसलों की बिजाई शुरू हो जाएगी। खरीफ की प्रमुख फसलों में कपास अहम मानी जाती है। कृषि विभाग हनुमानगढ़ के सहायक निदेशक बलकरण सिंह के अनुसार सरकार स्तर पर बीटी कॉटन की बिजाई को लेकर अनुमति प्रदान कर दी गई है। किसानों से बीज खरीदने के बाद पक्का बिल लेने की सलाह दी गई है। ताकि बीज में किसी तरह का हेरफेर होने की स्थिति में संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।
ताकि हो सुंडी नियंत्रण
कपास की फसल में गुलाबी सुंडी के प्रकोप को रोकने के लिए कृषकों को कृषि विभाग की ओर से तकनीकी उपाय अपनाने की सलाह दी जा रही है। समन्वित कीटनाशी प्रबंधन को अपनाने की सलाह विभागीय अधिकारी दे रहे हैं। किसानों को चाहिए कि वह गर्मी में गहरी जुताई कर फसल चक्र अपनाएं। खेत व उसके आसपास उगे खरपतवारों को नष्ट करें। बीटी कपास की बिजाई एक मई से बीस मई के बीच ही करें ताकि फसल पर गुलाबी सुंडी के प्रभाव को कम किया जा सके। बीटी कपास की पुरानी टिंडियों और अवशेषों को खेत में एकत्रित नहीं करें। यदि खेत में बन्छट्टियां (पुराने कपास के पौधों की लकडिय़ां) पड़ी हैं तो उन्हें झाडकऱ अलग करें। टिंडियों को जलाकर नष्ट करें। गुलाबी सुंडी प्रभावित क्षेत्रों से अप्रभावित क्षेत्रों में बीटी कपास की लकडिय़ों को नहीं ले जाएं। ऐसा करके संक्रमण को काफी हद तक रोक सकेंगे।
पानी का संकट तो अपना रहे तकनीक
जिले में इस वक्त नहरी पानी का सकट चल रहा है। बांधों में पानी नहीं होने की वजह से नहरों में पानी नहीं चलाया जा रहा है। सिंचाई पानी के संकट से जूझ रहे किसान अब ड्रिप इरीगेशन की तरफ आगे बढ़ रहे हैं। कुछ कपास उत्पादक किसानों ने खेतों में ड्रिप लगाई है। खेती के आधुनिक तौर तरीके अपनाकर किसान कम पानी में भी अच्छी पैदावार ले रहे हैं।