
देश में हनुमानगढ़ जिले की आबोहवा सबसे प्रदूषित, वायु में प्रदूषण घुलने से सांस रोगियों की बढ़ी मुश्किलें
-हनुमानगढ़ जिले में हवा का एक्यूआई स्तर 416 तक पहुंंचा
-प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने 36 उद्योगों के मालिक को थमाया नोटिस, छह पीओपी फैक्ट्री व दो ईंट उद्योग को बंद करने का आदेश
हनुमानगढ़. जिले में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। नवम्बर 2023 की शुरुआत में हनुमानगढ़ जिला प्रदूषण के मामले में नंबर वन पर आ गया था। वहीं 27 नवम्बर को फिर से हनुमानगढ़ जिला देश में सबसे प्रदूषित शहरों में शुमार हो गया। जिले में प्रदूषण का स्तर 416 एक्यूआई तक पहुंच गया है। इससे पर्यावरणविदें व आमजन में बेचैनी बढ़ रही है। प्रथम दृष्टया पराली जलाने की वजह से इस तरह आबोहवा प्रदूषित होने की जानकारी मिल रही है। इसके अलावा कुछ उद्योग धंधे भी ऐसे संचालित हो रहे हैं, जो वातावरण को प्रदूषित कर रहे हैं। इस स्थिति में अब प्रदूषण नियंत्रण मंडल की टीम भी सक्रिय होकर कार्रवाई करने में लग गई है। प्रदूषण नियंत्रण मंडल की टीम ने अब हनुमानगढ़ जंक्शन में दो पीओपी फैक्ट्रियों को बंद करने का आदेश जारी किया है। जबकि रावतसर-ब्रह्मसर में चार पीओपी फैक्ट्रियों व भादरा की दो ईंट भ_ों को बंद करने का निर्देश जारी किया है। इसमें हनुमानगढ़ जंक्शन की रामा पीओपी व प्रिंस प्लास्टर उद्योग का नाम शामिल होने की सूचना है। इसी तरह रावतसर-ब्रह्मसर क्षेत्र में संचालित भगवती उद्योग, जगदम्बा इंडस्ट्रीज, गजानंद इंडस्ट्रीज व चौधरी इंडस्ट्रीज शामिल है। भादरा में संचालित चौहान ईंट उद्योग व भगवती ईंट उद्योग के संचालक को भी बंद करने का नोटिस जारी किया गया है। इसी तरह जिले में संचालित 36 फैक्ट्री संचालकों को प्रदूषण नियमों की अवहेलना करने पर नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा गया है। गौरतलब है कि गत दिनों जिले में पराली जलाने की घटना होने पर संबंधित पुलिस थानों के प्रभारी को इसे रोकने की जिम्मेदारी दी गई थी। पुलिस को खेतों की भी पूरी निगरानी करने को लेकर निर्देशित किया गया है। उच्चतम न्यायालय दिल्ली में लंबित याचिका को देखते हुए राज्य सरकार ने उक्त आदेश जारी किया था। उक्त याचिका में एनसीआर में बढ़ रहे वायु प्रदूषण को गंभीर बताकर सेहत पर पड़ रहे दुष्पप्रभाव का उल्लेख किया गया था। ्रप्रदूषण नियंत्रण मंडल कार्यालय हनुमानगढ़ के आरएम बीआर सिहाग के अनुसार जिले की हवा में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। हम इसके सही कारणों को तलाशने में लगे हैं। जिले में संचालित 36 फैक्ट्री संचालकों को नोटिस जारी किया गया है। जबकि कुछ पीओपी फैक्ट्रियों को बंद भी किया गया है। हम लगातार प्रदूषण कम करने को लेकर प्रयासरत हैं।
आबोहवा की बदल रही रंगत
इस बार नवम्बर 2023 की शुरुआत होते ही हनुमानगढ़ जिले में धान की पराली को जलाने का काम शुरू हो गया था। इसकी वजह से नवम्बर महीना शुरू होते ही जिला देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल हो गया। हवा में धुंआ फैलने की वजह से आसपास की आबोहवा की रंगत लगातार बदल रही है। इस वजह से सांस की बीमारी वाले लोगों की स्थिति खराब हो रही है।
जिले में चिंताजनक स्थिति
प्रदूषण नियंत्रण मंडल के मानकों के अनुसार किसी क्षेत्र में हवा में एक्यूआई का स्तर 0 से 50 तक रहने पर अच्छा माना जाता है। वहीं 51 से 100 के बीच में रहने पर संतोषनजक व 401 से 500 के बीच रहने पर गंभीर व चिंताजनक माना जाता है। हनुमानगढ़ जिले में एक्यूआई का स्तर 416 तक पहुंचने की वजह से चिंता बढ़ रही है।
इतने जुर्माने का प्रावधान
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल बोर्ड, नई दिल्ली की ओर से गत बरसों में जारी निर्देश अनुसार फसल अवशेष जलाने पर दो एकड़ क्षेत्रफल तक 2500 रुपए, 2 से 5 एकड़ क्षेत्रफल तक 5000 रुपए तथा 5 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में फसल अवशेष जलाने पर 15000 रुपए पर्यावरण क्षति पूर्ति के रूप में जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है। कृषि विभाग स्तर पर कृषकों से अपील की जा रही है कि धान फसल कटाई उपरान्त फसल अवशेष, पराली जलाने की बजाय उचित प्रबंधन करें। ताकि पशुओं के लिए चारे की किल्लत भी कम हो सके एवं पर्यावरण को प्रदूषित होने से भी बचाया जा सके। परंतु बड़े स्तर पर इसके लिए जब तक प्रोजेक्ट बनाकर किसानों को उचित अनुदान योजना शुरू नहीं की जाती, तब तक पराली का बेहतर प्रबंधन संभव नहीं है।
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प्रबंधन की जरूरत
जिले में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। जिले में कई ईंट उद्योग चल रहे हैं। आधुनिक तकनीक का उपयोग अनिवार्य किया जा सकता है। जिससे हवा में प्रदूषण का स्तर कम हो सके। इसके अलावा पराली का प्रबंधन भी करने की जरूरत है। ताकि किसान इसे नहीं जला सकें।
-नरेश मेहन, पर्यावरण प्रेमी, हनुमानगढ़
ज्यादा पौधे लगाएं
जिले में प्रदूषण का स्तर लगातार बढऩा चिंताजनक है। स्तर सुधार के लिए अधिकाधिक संख्या में पौधे लगाने चाहिए। सडक़ किनारे लगाए जा रहे चौके भी पौधों को विकसित करने में दिक्कत देते हैं। सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग भी पूर्णतया वर्जित होना चाहिए। तभी प्रदूषण का स्तर सुधर सकेगा।
-लाधुसिंह भाटी, संरक्षक, मानव सेवा उत्थान हनुमानगढ़
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