हनुमानगढ़

जब समझ में आया कामकाज, तो हो गया ट्रांसफर

अफसरों पर भारी जनप्रतिनिधि : दो साल से ज्यादा का कार्यकाल बहुत कम अधिकारियों का रहा बीडीओ, ईओ, थाना प्रभारियों का कार्यकाल बहुत कम  

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जब समझ में आया कामकाज, तो हो गया ट्रांसफर

मनोज कुमार गोयल
हनुमानगढ़. जिले में प्रशासनिक अधिकारियों पर जनप्रतिनिधि हावी हैं यह कहें तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। इस का स्पष्ट उदाहरण जिले की प्रशासनिक मशीनरी में कार्यरत अफसरों के बार-बार हो रहे तबादले हैं। हालात यह हैं कि जिले के ग्रामीण विकास की धूरी विकास अधिकारी (बीडीओ) और शहरी विकास के लिए उत्तरदायी अधिशासी अधिकारी (ईओ) और कानून व्यवस्था बनाने में महत्वपूर्ण थाना प्रभारियों के बहुत कम समय में स्थानान्तरण हो रहे हैं। जिले में कई पंचायत समितियों में तो विकास अधिकारी दो साल में चार-चार बदल गए हैं। ऐसा ही हाल थाना प्रभारियों का है। जिले थानाा प्रभारियों का औसत कार्यकाल एक साल से भी कम है। पीलीबंगा और संगरिया नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी और टिब्बी पंचायत समिति में विकास अधिकारी का कार्यकाल भी बहुत कम रहा है। इनका सबका नतीजा यह है कि पंचायत राज और शहरी निकायों का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

पीलीबंगा और टिब्बी में बीडीओ बार-बार बदले
जिले की टिब्बी पंचायत समिति करीब दस वर्ष पहले बनी थी। इस पंचायत समिति में विकास अधिकारी औसतन चार माह ही रह पाया है। रिकॉर्ड को देखें तो पंचायत समिति के गठन के बाद अब तक इसमें स्थायी व कार्यवाहक मिलाकर 32 विकास अधिकारी कार्यभार संभाल चुके हैं। इनके कार्यकाल का औसत निकाला जाए तो यह मात्र चार माह बैठता है। कार्यभार संभालने वालों में 19 आरएएस स्तर के अधिकारी थे जब कि 13 कार्यवाहक विकास अधिकारी रहे। यहां स्थान्नन्तरित होकर आया अधिकारी जब तक कामकाज समझता है तब तक उसका फिर से स्थान्नान्तरण हो जाता है। विकास अधिकारियों के लगातार स्थान्नान्तरण के चलते क्षेत्र के विकास कार्य पर भी प्रभाव पड़ता है। कमोबेश यही स्थिति पीलीबंगा पंचायत समिति की रही है। पीलीबंगा में पंचायत समिति में मार्च 2018 से वर्तमान तक 12 अधिकारी विकास अधिकारी के रूप में रह चुके हैं। यानि लगभग साढ़े तीन साल में औसत कार्यकाल लगभग चार माह रहा। चार माह के अल्प कार्यकाल में विकास अधिकारी ने कर्मियों, अधिकारियों और पंचों-सरपंचों से पहचान के बाद क्षेत्र को समझा, उनका स्थानान्तरण हो गया।

पीलीबंगा में १३ माह में पांच ईओ के पास रहा कार्यभार
पीलीबंगा नगर पालिका जिले की सबसे महत्वपूर्ण नगर निकाय मानी जाती है। इसके हालात इस वर्ष तो सबसे ज्यादा विकट रहे। जब जिस जनप्रतिनिधि का ‘सिक्का’ चला, उन्होंने अधिशासी अधिकारी नियुक्त करवा दिया और हटवा दिया। वर्तमान ईओ सत्यनारायण को आए हुए अभी महज एक पखवाड़ा हुआ है और वर्तमान अध्यक्ष उन्हें हटाने के लिए आंदोलन तक कर चुके हैं। हालांकि वर्तमान में दोनों में उपखण्ड अधिकारी की मौजूदगी में समझौता हो चुका है। पीलीबंगा नगर पालिका में गत वर्ष पांच सितम्बर से अब तक पांच ईओ शैलेन्द्र गोदारा, गोपीचंद दाधीच, पवन चौधरी, शैलेन्द्र गोदारा और सत्यनारायण स्वामी बारी-बारी से रह चुके हैं। इनमें पवन चौधरी और शैलेन्द्र गोदारा का तो कार्यकाल तो पन्द्रह दिन से भी कम रहा था।

थाना प्रभारी और चौकी प्रभारियों के हालात विकट
प्रशासन के साथ-साथ पुलिस में भी थाना प्रभारियों का कार्यकाल औसतन आठ-दस महीनों का रहा है। थाना प्रभारी कहीं आठ तो कहीं दस माह रह पा रहे हैं। हनुमानगढ़ टाउन पुलिस थाना में वर्तमान कांग्रेस सरकार के पौने तीन साल के कार्यकाल में छठे थाना प्रभारी वर्तमान में कार्यरत हैं। कमोबेश यही स्थिति हनुमानगढ़ जंक्शन, सदर सहित अन्य पुलिस थानों की है। पुलिस चौकी प्रभारियों के कार्यकाल का औसत तो इससे भी कम का है।

26 साल के दौरान जिले में रहे 34 सीईओ
जिला परिषद ग्रामीण विकास की मुख्य धुरी है। जिसमें मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) भी औसतन हर साल तब्दील हुआ। 14 जुलाई 1994 को हनुमानगढ़ जिला बना था। तब से अब तक 34 आरएएस मुख्य कार्यकारी अधिकारी की कुर्सी पर विराज चुके हैं। यानि औसतन नौ से दस माह एक अधिकारी जिला परिषद में रहा। सात तहसीलों और सात पंचायत समितियों में विभक्त लम्बे-चौड़े जिले में नौ-दस महीनों में सीईओ बदलने से सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि पंचायत राज व्यवस्था में योजनाओं की कितनी निगरानी हो रही है। खास बात यह है कि जिले में अधिकांश समय एसीईओ का पद रिक्त रहा है। वर्तमान में भी यह पद रिक्त है। वर्तमान कांगे्रस सरकार नवम्बर 2018 में बनी, तब से सीईओ के पद पर वर्तमान में पांचवें अधिकारी हैं।

संगरिया में अधिशासी अधिकारी रहे आया राम-गया राम
नाम समयावधि
संदीप कुमार सियाग 17-10-2017 से 22-3-2018
अरविंद खन्ना 24-3-2018 से 28-3-2018
गुरदीप सिंह 29-3-2018 से 17-1-2019
देवेंद्र कौशिक 17-1-2019 से 21-6-2019
पवन चौधरी 24-6-2019 से 26-6-2019
शैलेंद्र गोदारा 27-6-2019 से 19-7-2019
पवन चौधरी 19-7-2019 से 6-8-2019
अरविंद खन्ना 7-8-2019 से 11-9-2019
पवन चौधरी 11-9-2019 से 1-10-2019
सत्यनारायण स्वामी 3-10-2019 से 26-12-2019
अरविंद खन्ना 26-12-2019 से 11-1-2020
देवेंद्र कौशिक 12-1-2020 से 14-1-2020
सत्यनारायण स्वामी 15-1-2020 से 16-9-2020
पुरुषोतम जैन 17-9-2020 से 22-9-2020
रणजीत खुडिया 22-9-2020 से 29-9-2020
पुरुषोत्तम जैन ३०-9-2020 से ०७-१-202१
जयकरण गुर्जर ०८-१-202१ से १४-१-202१
पुरुषोत्तम जैन 1४-१-202१ से निरन्तर


राजनीतिक कारणों से होते हैं तबादलें
- नगर निकायों और पंचायत राज में अधिकारियों के बार-बार और जल्दी-जल्दी तबादलों का मुख्यतया राजनीतिक कारण रहता है। हर राजनीतिक दल अपने अनुरूप कार्य चाहता है, ऐसे में अधिकारियों के तबादले होते हैं। मेरा मानना है कि बड़ी वजह नहीं हो तो कम से कम से ढाई से तीन साल तक एक अधिकारी को एक पद पर पदस्थापित रखना चाहिए।
डॉ. रामप्रताप, पूर्व मंत्री एवं भाजपा नेता।

तय होना चाहिए कार्यकाल
- पंचायत राज और स्थानीय निकायों में अधिकारियों के तबादले कम से कम होने चाहिए, उन्हें क्षेत्र को समझने और कार्य करने का मौका दिया जाना चाहिए। कोई बड़ी वजह नहीं हो तो कम से कम दो साल का कार्यकाल एक अधिकारी का होना चाहिए। अपने जिला मुख्यालय पर तो स्थिति काफी ठीक है।
चौधरी विनोद कुमार, विधायक एवं कांग्रेस नेता।

Published on:
28 Oct 2021 11:19 pm
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