
Hidradenitis Suppurativa Symptoms: शरीर पर कभी-कभी एक-आध फोड़ा या फुंसी होना बहुत आम बात है, जो कुछ दिनों में अपने आप ठीक भी हो जाती है। लेकिन क्या आपके साथ ऐसा होता है कि शरीर के एक ही हिस्से में बार-बार बड़े, लाल और बेहद दर्दनाक फोड़े निकल आते हैं? अगर हां, तो इसे साधारण गर्मी या खून की खराबी मानकर टालने की गलती बिल्कुल न करें। मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) के अनुसार, बार-बार होने वाले ये गांठदार और मवाद वाले फोड़े हाइड्राडेनाइटिस सुपुराटिवा (Hidradenitis Suppurativa - HS) नाम की बीमारी का संकेत हो सकते हैं। यह त्वचा से जुड़ी एक ऐसी दर्दनाक और पुरानी समस्या है जो इंसान की रोजमर्रा की जिंदगी को बहुत मुश्किल बना देती है। समय रहते इसकी पहचान न होने पर यह समस्या काफी बढ़ सकती है। आइए समझते हैं कि यह बीमारी क्या है, इसके क्या लक्षण हैं और इससे राहत कैसे पाई जा सकती है।
डर्मनेट के अनुसार, हाइड्राडेनाइटिस सुपुराटिवा त्वचा की एक ऐसी स्थिति है जिसमें त्वचा के नीचे दर्दनाक गांठें और फोड़े बनने लगते हैं। कई लोग इसे इन्फेक्शन या साफ-सफाई न रखने की वजह से हुई समस्या समझ लेते हैं, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। यह बीमारी तब शुरू होती है जब हमारे शरीर के पसीने वाली ग्रंथियों (Sweat glands) के पास मौजूद बालों की जड़ें (Hair follicles) किसी वजह से बंद हो जाती हैं। जब ये छिद्र बंद होते हैं, तो अंदर पसीना और गंदगी जमा होने लगती है, जिससे वहां सूजन आ जाती है और वे फोड़े का रूप ले लेते हैं। यह समस्या ज्यादातर शरीर के उन हिस्सों में होती है जहां त्वचा आपस में रगड़ खाती है, जैसे;
यह बीमारी हर इंसान में अलग-अलग तरह से दिख सकती है। कुछ लोगों में यह हल्की होती है, तो कुछ में बहुत गंभीर। इसके मुख्य लक्षणों में शामिल हैं:
हाइड्राडेनाइटिस सुपुराटिवा (HS) क्यों होती है, इसका कोई एक सटीक कारण तो तय नहीं है, लेकिन मेडिकल रिसर्च के मुताबिक इसके पीछे ये मुख्य वजहें हो सकती हैं:
अगर आपके फोड़े 2 से 3 हफ्ते में ठीक नहीं हो रहे हैं, वे बहुत ज्यादा दर्द दे रहे हैं, चलने-फिरने में तकलीफ हो रही है, या उनसे लगातार बदबूदार मवाद बह रहा है तो बिना झिझक के तुरंत किसी अच्छे चर्म रोग विशेषज्ञ (Dermatologist) को दिखाएं।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।