
होशंगाबाद। गूगल गुरु की पूछपरख अब दिनों दिन बढ़ती जा रही है। यह हमारी दिनचर्या का एक अहम हिस्सा बन गया है वहीं विभिन्न विभागीय कामों में इसकी मदद ली जाती है। ताजा मामला है शिक्षा विभाग का जहां इसकी मदद ली गई है। माध्यमिक स्कूलों को हाईस्कूल में अपग्रेड करने के लिए जिले के ३२ स्कूलों का चयन किया गया। स्कूलों के उन्नयन के लिए विभाग का नियम है कि संबंधित माध्यमिक स्कूल के ५ किमी की परीधि में अन्य कोई हाईस्कूल नहीं होना चाहिए। माध्यमिक स्कूल से संबंधित स्कूलों की दूरी के लिए विभाग ने गूगल मैप का सहारा लिया। दूरी के हिसाब से चयनित २० स्कूलों के पांच किमी के दायरे में अन्य कोई स्कूल दिखा रहा है, जबकि उसकी वास्तविक दूरी ५ किमी से अधिक है। साथ ही अन्य १२ स्कूलों की दूरी अधिक दिखाई जा रही है जबकि स्कूलों की दूरी वास्तविकता में कम है। यही कारण है कि विभाग के अधिकारी अब स्कूलों की वास्तविक दूरी पता करने के लिए संबंधित प्रधानपाठकों से जानकारी बुला रहे हैं। जिससे स्कूलों की वास्तविक दूरी का आकलन किया जा सके।
एक शिक्षा परिसर में भी दिक्कत
एक ही परिसर में संचालित योजनाओं में भी जीआईएस मैपिंग में दर्ज की गई दूरी का भी वास्तवित सत्यापन होना है। योजना के तहत किसी प्राथमिक स्कूल के एक किमी की परिधि में कोई अन्य प्राथमिक स्कूल व ३ किमी की परिधि में कोई अन्य माध्यमिक स्कूल नहीं होना चाहिए। गूगल मैप के दौरान दर्शायी गई दूरी में वास्तविकता से अलग है। यही कारण है कि लोकशिक्षण संचालनालय आयुक्त नीरज दुबे ने सभी स्कूलों में जीआईएस मैपिंग के आधार पर चिंहित किए गए स्कूलों का भौतिक सत्यापन कराने के निर्देश दिए हैं।
&स्कूलों की वास्तविक दूरी की गणना के लिए प्रधानपाठकों से मैनुअली जानकारी बुलाई जा रही है। प्राप्त जानकारी की समीक्षा कर प्रस्ताव विभाग को भेजा जाएगा।
राजेश गुप्ता, एडीपीसी