होशंगाबाद

किससे था भय्यू महाराज को खतरा, हो सीबीआई जांच

संंत को क्यों था हथियार रखने का शौक

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बैतूल। भय्यू महाराज अपने साथ बंदूक रखते थे, उनको किसी से जान का खतरा था, आत्महत्या के बाद इस तरह के सवाल उठने लगे हैं। बैतूल जिले की मुलताई विधानसभा के पूर्व विधायक डॉ. सुनीलम ने संत भय्यू महाराज की मौत की सीबीआई की जांच की मांग की है। ताकि वालों के जबाव मिल सकें। डॉ. सुनीलम ने एक विज्ञप्ति जारी कर यह सवाल उठाते हुए, सीबीआई जांच की मांग की है। उन्होंने सवाल उठाया हैं कि बाबा होकर बंदूक रखना आश्चर्यजनक जनक है। क्या उन्हें किसी से जान का खतरा था। पहली पत्नी की मौत का क्या आत्महत्या से कोई संबंध है। वे मानसिक अवसाद से क्यों पीडि़त हुए। उनका इलाज क्यों नहीं कराया गया? वे कब से इस मानसिक हालात में थे ? सम्पत्ति का, उत्तरिधिकार को लेकर तो ---- नहीं हुई। जैसे तम्माम प्रश्न का उत्तर खोजना जरूरी है। इसलिए इन सभी की सीबीआई से जांच होनी ही चाहिए।

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8 साल पहले आए थे बैतूल
जिंदगी से परेशान होकर आत्महत्या करने वाले भय्यूजी महाराज ने 08 साल पहले मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में शहरवासियों को शांति का पाठ पढ़ाया था। भय्यूजी महाराज कि 24 मार्च 2010 में प्रवास पर बैतूल आए थे। यह कार्यक्रम भय्यूजी महाराज के सद्गुरु ट्रस्ट के ट्रस्टी और वरिष्ठ लेखक राजीव खंडेलवाल ने आयोजित किया था। जिसमें उनको आमंत्रित किया गया।

1 माह पहले फिर आने वाले थे बैतूल
भय्यूजी महाराज का बैतूल से पुराना लगाव रहा है। वह 2010 के बाद 17 मई 2018 फिर से बैतूल आने वाले थे, दरअसल वरिष्ठ लेखक और भाजपा नेता रहे राजीव खंडेलवाल की पुस्तक 'कुछ सवाल जो देश पूछ रहा हैÓ के विमोचन पर वह बैतूल आने वाले थे।

आईसीयू में भर्ती होने से नहीं आ सके
कार्यक्रम के एक दिन पहले ही रात करीब ८ बजे पता चला कि भय्यूजी महाराज अब नहीं आएंगे। दरअसल उनका स्वास्थ्य खराब होने के कारण आईसीयू में भर्ती कराया गया था, जिस कारण वह कार्यक्रम में शामिल होने के लिए नहीं आ सके थे।

निधन पर किसने क्या कहा -
सद्गुरू दत्त धार्मिक एवं पारमार्थिक ट्रस्ट के संस्थापक भय्यूजी महाराज के निधन पर पूर्व नगर सुधार न्यास अध्यक्ष एवं पूर्व ट्रस्टी राजीव खण्डेलवाल ने शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि सामाजिक सरोकार व रचनात्मक भारतीयता के लिए आध्यात्म का जो सम्मिश्रण मैंने उनके व्यक्तित्व में देखा वह भाव किसी अन्यों में नहीं पाया। वे न केवल आध्यात्मिक गुरूजी, न ही सिर्फ प्रवचनकर्ता न सिर्फ संत और न ही एक प्रकांड विद्वान थे बल्कि एक सम्पूर्ण समाज निर्माण के सामाजिक सरोकार का दायित्व का भार लिए हुए आध्यात्मिक गुरू कैसा होता है उस विलक्षण वास्तविक प्रतिभूति के रूप में वे एक राष्ट्रवादी राष्ट्रीय व्यक्तित्व के संत थे।

Updated on:
12 Jun 2018 07:54 pm
Published on:
12 Jun 2018 06:52 pm
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