जियोलॉजिकल सर्वे की टीम ने पचमढ़ी के आसपास शुरु किया भू-वैज्ञानिक सर्वे
पिपरिया। प्रदेश से बड़ी खबर आ रही है, दरअसल सतपुड़ा की रानी पचमढ़ी में जियोलॉजिकल सर्वे किया जा रहा है। यहां सैकड़ों साल पुराने जीवाश्म की तलाश की जा रही है। इसके लिए गुरुवार से जियोलॉजिकल सर्वे जीआइएस यानि भू-वैज्ञानिक सर्वे टीम ने पचमढ़ी-पिपरिया के बीच भूमि का सर्वे शुरु किया है। टीम को होशंगाबाद, बैतूल, छिंदवाड़ा जिलों का सर्वे कार्य सौंपा गया है। प्राचीन क्षेत्रों में पहाड़ों के नजदीक विशेष यंत्रों से टीम सर्वे कर रही है। मिशन-1 के तहत सर्वे रिपोट खनन मंत्रालय को सौंपी जाएगी।
गुरुवार को भू-वैज्ञानिक सर्वे टीम के पूजा दास और देवराज ने अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ पिपरिया-पचमढ़ी के बीच भूमि का सर्वे कर परिणाम एकत्र किए।
मिनरल, रॉक की प्रकृति जांची
पूजा दास ने बताया कि भूमि के अंदर मिनरल, रॉक की प्रकृति, गड़बडिय़ां मशीनों के माध्यम से जांची गई। इसके बाद उसका प्रतिवेदन तैयार किया जाएगा। खनन मंत्रालय ने भू-वैज्ञानिक सर्वे के लिए पचमढ़ी का सराउंडिंग क्षेत्र, बोरी, पिपरिया सर्वे के लिए चिन्हित किया है। भूगर्भीय परिवर्तन के साथ चिन्हित क्षेत्र की भूमि के अंदर विशेष मिनरल, रॉक मिलने की संभावना है। उपकरणों से भूमि के अंदर की हलचल के साथ विशेष जीवाष्म, वनस्पतियों के भंडारण, भूमि की शक्ति आदि का आंकलन होगा। वहीं विलुप्त हो चुके मिनरल आदि मिलने की संभावना है जो पूरे सर्वे के बाद निकल कर सामने आएगी। होशंगाबाद जिले में सतपुड़ा की रानी पचमढ़ी काफी प्रसिद्ध है यहां सैकड़ों साल पुरानी पहाड़, औषधीए पेड़ पौधे हैं नजरी सर्वे में इसे खनन मंत्रालय ने सर्वे के लिए चयनित किया है। गौरतलब है कि सतपुड़ा की रानी पचमढ़ी और पिपरिया के आसपास काफी पहाड़ी एरिया है, इसलिए यहां पर खनिज संपदा होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। इसी लिए विभाग की तरफ से यहां पर पुराने मिनरल्स और अन्य खोज के लिए सर्वे किया जा रहा है।