
मनोज कुंडू, होशंगाबाद. नेपाल सहित देश के विभिन्न राज्यों में 40 से ज्यादा चैंपियनशिप में स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक, अवार्ड हासिल कर इटारसी का नाम गौरवान्वित करने वाला खिलाड़ी अब गुमनामी में जी रहा है। आर्थिक परेशानी की वजह से खेल छोड़ जीवन की गाड़ी अब ठेले पर खींच रहे हैं।
इटारसी के दीवान कॉलोनी में रहने वाले कैलाश बारीवा (48) कभी कराटे के मशहूर खिलाड़ी हुआ करते थे। शारीरिक विकलांगता के बावजूद उन्होंने हौंसले व लगन की बदौलत कराटे में ना केवल ब्लैक बेल्ट हासिल किया, बल्कि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में विरोधियों को धूल भी चटाई।
कैलाश ने बताया कि आर्थिक परेशानी और पारिवारिक जिम्मेदारियों की वजह से वर्ष 1997-98 में कराटे को अलविदा कहना पड़ा। वर्तमान में कैलाश हाथ ठेले पर प्लास्टिक के खिलौने व अन्य सामान बेचकर परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। बकौल कैलाश- यदि समय पर शासकीय मदद मिलती तो मैं भी देश के लिए पदक जरूर हासिल करता।
दीवान कॉलोनी के पहले कैलाश न्यूयार्ड रेलवे कॉलोनी में रहते थे। तब पिता मदनलाल रेलवे में नौकरी करते थे। कैलाश ने बताया कि कक्षा दसवी में पढऩे के दौरान वर्ष 1990 में उन्हें घर के बाहर जबरदस्त करंट लगा था। हादसे में उनका दाहिना हाथ काटना पड़ा था।
इसके बाद उन्होंने कराटे सीखने का जुनून सवार हुआ। वर्ष 1992-93 में उन्होंने ब्लैक बेल्ट हासिल किया। जिसके बाद आठ साल में विभिन्न प्रतियोगिताओं में शामिल होकर कई पदक जीते। जिसमें अंतर्राष्ट्रीय गोल्ड मेडल और अंतर्राष्ट्रीय बेस्ट फाइटर का अवार्ड भी शामिल किया है।
कैलाश बारीवा को 1995 में नेपाल में गोल्ड मेडल, पूना में इंटरनेशनल कराटे प्रतियोगिता में बेस्ट फाइटर अवार्ड और कांस्य पदक से सम्मानित किया गया। बारिवा ने अपने खेल कॅरियर के दौरान आठ वर्षों में दस स्वर्ण पदक, ग्यारह रजत पदक, सात कांस्य पदक और तीन बेस्ट फाइटर का अवार्ड हासिल किया है।