फ्री का कनेक्शन, सिलेंडर भरवाने पैसा नहीं
होशंगाबाद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों के लिए फ्री गैस कनेक्शन व चूल्हा देने की जून 2016 में शुरुआत की थी। योजना के तहत अब तक जिले में 55 हजार 761 कनेक्शन दिए जा चुके हैं। सरकार ने 2020 तक योजना का फायदा 8 करोड़ परिवारों तक पहुंचाने का लक्ष्य भी तय किया है।
'पत्रिकाÓ ने इस योजना की पड़ताल की तो चौंकाने वाला सच सामने आया। जिन परिवारों को गैस कनेक्शन दिए गए हैं वहां महिलाएं अब भी मिट्टी के चूल्हों में लकडिय़ां जलाकर धुंए के बीच ही भोजन बना रहीं है। कारण सिलेंडर भरवाने के लिए उनके पास पैसा नहीं है। आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं ने कहा कि जंगल में जलाऊ लकड़ी फ्री में मिल जाती है। गैस टंकी भरवाने और शहर तक आने-जाने में ही एक हजार रुपए तक खर्च होता है। ऐसे में घर चलाएं या गैस टंकी भरवाएं।
पैसे नहीं हैं चूल्हे पर खाना बनाना अब हमारी मजबूरी
यह मेहरागांव निवासी भगवती बाई पाल है। पति श्रीराम पाल मजदूरी करता है। दोनों की उम्र ५५ पार है। न बच्चे हैं न अन्य कोई रिश्तेदार। दोनों अकेले हैं। मजदूरी करके जीवन-यापन कर रहे हैं। घर खर्च चला पाना मुश्किल हो रहा है। गैस सिलेंडर भराने के लिए पैसे कहां से लाएं। आठ महीने से गैस सिलेंडर खाली है, चूल्हे पर खाना बनाने की मजबूरी है।
मजदूरी करके घर चलाना मुश्किल हो रहा गैस की टंकी कहां से लाएं
यह केसला ब्लॉक के पिपरियाकला गांव की रहने वाली शिववती कासदे है। पति कमल और शिववती दोनों मजदूरी करते हैंं। बच्चों की परवरिश के बाद घर चलाना मुश्किल हो रहा है। गैस के लिए रुपए कहां से लाएं। सरकार ने गैस तो दे दी मगर फ्री में गैस भरवाने की कोई सुविधा नहीं दी। एक साल पहले टंकी और चूल्हा मिला था। दोबारा नहीं भरवाया।
पैसे नहीं है, फ्री में मिल जाती है लकड़ी
केसला ब्लॉक की सहेली गांव में रहने वाली कमलाबाई को गैस जलाना नहीं आता। इसलिए घर पर भरी टंकी रखी हुई है। जबकि वह रोज चूल्हे पर खाना बनाती है। कमलाबाई ने कहा कि टंकी खाली हो गई तो भरवाएंगे कैसे। मजदूरी करके घर चला रहे हैं। घर के पास जंगल है और जलाऊ लकड़ी फ्री में मिल जाती है। इसलिए गैस की बजाय चूल्हा ही अच्छा है।
25 प्रतिशत लोग ही भरवा रहे टंकी
जिले में पिछले एक साल में 55761 कनेक्शन दिए गए। जिनमें से बमुश्किल 20 से 25 प्रतिशत लोग ही गैस टंकी रिफिल करवा रहे हैं। हितग्राहियों ने कहा कि उज्जवला योजना से दी जाने वाली टंकी के दाम भी कम होना चाहिए। जिससे लोग उसका उपयोग कर सकें।
ये हैं योजना में पात्र परिवार
- आवेदक की उम्र 18 साल या इससे अधिक होनी चाहिए।
- हितग्राही बीपीएल परिवार की महिला ही होनी चाहिए।
- घर में किसी अन्य के नाम से पहले कोई गैस कनेक्शन नहीं होना चाहिए।
- महिला के पास बीपीएल राशन कार्ड का होना आवश्यक है।
फैक्ट फाइल
जिले में कुल एलपीजी एजेंसी 20
उज्जवला कनेक्शन
55761
रिफिल हो रहे
20 से 25 प्रतिशत
&हां यह सही है कि उज्जवला योजना के हितग्राही दूसरी बार बहुत कम टंकी भरवा रहे हैं। जिले का रूट चार्ट बनाकर एजेंसियों को दिया है। जिससे हितग्राही को गांव में ही टंकी उपलब्ध हो सके। गैस एजेंसियों से लोगों को जागरुक करने के लिए कह रहे हैं।
-बीएस तोमर, जिला आपूर्ति नियंत्रक होशंगाबाद