होशंगाबाद

Patrika Special मध्यप्रदेश के इन अस्पतालों में नहीं है वेंटिलेटर, दो डाॅक्टर्स के भरोसे अस्पताल

Fight against Corona आइसोलेशन वार्ड तैयार, नहीं तैनात हो सके डाॅक्टर आपात स्थिति में बिगड़ सकते है हालात

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Patrika Special मध्यप्रदेश के इन अस्पतालों में नहीं है वेंटिलेटर, दो डाॅक्टर्स के भरोसे अस्पताल

पिपरिया। एक तरफ धनाढ्यों व अफसरों द्वारा खुद के लिए निजी वेंटिलेटर (ventilators for Corona patients) खरीदी की खबरें आ रहीं तो दूसरी ओर नाकाफी सरकारी इंतजामात होशफाख्ता कर रहे। कोरोना वायरस से लड़ने के लिए होसंगाबाद जिले (Hosangabad) के पिपरिया (Pipariya), पचमढ़ी (Pachmadhi)और बनखेड़ी में बने आईसोलेशन वार्ड (Isolation ward) में डाॅक्टर तक तैनात नहीं हो सके हैं। हद तो यह कि अगर हालात बिगड़े तो यहां एक भी वेंटिलेटर मौजूद नहीं है। इंतजामिया का तर्क यह है कि कोरोना संक्रमित की हालत बिगड़ी तो उनको बेहतर चिकित्सीय सुविधा के लिए रेफर कर दिया जाएगा।
होसंगाबाद का सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र पिपरिया, बनखेड़ी और हिलस्टेशन पचमढ़ी है। सतपुड़ा पहाड़ श्रृंखला की गोद में बसे इन क्षेत्रों में सरकार ने अस्पताल तो खोल रखे हैं लेकिन जरूरी सुविधाओं का सर्वथा अभाव है। यहां के लोगों को कोरोना महामारी से बचाने के लिए अस्पतालों में आईसोलेशन वार्ड भी बन गए हैं। अव्वल यह कि नौ बेड वाले इन वार्ड में जरूरी सुविधाओं का ही अभाव है। हालांकि, इस आईसोलेशन वार्ड में प्राथमिक चिकित्सा की गरज से संसाधन है, आक्सीजन की भी व्यवस्था है। परंतु विद्रुप यह कि यहां अभी तक डाॅक्टर्स की तैनाती नहीं हो सकी है।

मरीज मिले तो रेफर करना मजबूरी

पिपरिया, बनखेड़ी या पचमढ़ी के सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर (Government hospitals lacks Ventilator) नहीं होने पर यहां के मरीजों को मुख्यालय पर रेफर करना मजबूरी है। बीएमओ बताते हैं कि वेंटिलेटर की मांग की गई है, सरकार यह मांग पूरी कर सकती है। लेकिन बीएमओ चिंतित भी हैं। वह बताते हैं कि अगर वेंटिलेटर मिल भी जाए तो वह करेंगे क्या। वह इसलिए क्योंकि इसके संचालन के लिए उनके पास डाॅक्टर, टेक्निकल एक्सपर्ट व पैरामेडिकल स्टाॅफ ही नहीं है। अस्पताल के लोग मानते हैं कि फिलवक्त कोरोना का संक्रमण यहां जिले में नियंत्रित है। पर अचानक संक्रमित मरीज बढने पर वेंटीलेटर की कमी बड़ी परेशानी बन सकती है।

विदेश यात्रा से आए 13 लोग निगरानी में

पिपरिया में विदेश यात्रा से लौटे 13 व्यक्तियों को प्रशासन ने सूचीबद्ध किया है। ये सभी आइसोलेट है तथा स्वास्थ्य विभाग की लगातार निगरानी में है। रोजाना इनके स्वास्थ्य की जांच कर रिपोर्ट जिला मुख्यालय भेजी जा रही है। अस्पताल को रोजाना सेनेटाइज किया जा रहा है। गेट पर ही हैंडवाश से लोगों के हाथ धुलाई हो रही ताकि लोग संक्रमण से सुरक्षित रहे।

ओपीडी में तीन सौ मरीज रोज आ रहे, खौफ का माहौल

कोरोना संक्रमण से लोग तनाव में है। छींक आते ही सीधे सरकारी अस्पताल पहुंच रहे है। डॉक्टरों की कमी के कारण एक दो डॉक्टर के कक्ष में मरीजों की लंबी कतार लग रही है। सोशल डिस्टेंस का पालन पूरी तरह नही हो पा रहा। मरीज दर्जनों की संख्या में डॉक्टर के कमरे में प्रवेश कर रहे है। व्यवस्थाओं की कमी खतरनाक साबित हो सकती है।

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दो डाक्टरों के भरोसे अस्पताल

पिपरिया सरकारी अस्पताल में महज दो डॉक्टर ही ओपीडी देखते है। इन्हीं दो पर चैबीस घंटे अस्पताल की जवाबदारी रहती है। तीन महिला चिकित्सक है जो डिलेवरी व दांत के मरीजों को देखती है। जानकार बताते हैं कि कुछ माह पहले शासन ने दो डाक्टरों की पोस्टिंग की थी। लेकिन कोई भी यहां चार्ज लेने नहीं पहुंचा। किसी भी आपात स्थिति में यहां उपचार की उम्मीद करना बेमानी है।

अस्पताल पर है अतिरिक्त दबाव

बीएमओ डाॅ.एके अग्रवाल का कहना है कि वेंटिलेटर सहित अन्य मांग लंबित है। अस्पताल पर मरीजों का काफी दबाव है, डाॅक्टर्स की कमी है। शासन ने दो अतिरिक्त डाॅक्टर्स की पोस्टिंग की थी लेकिन वह ज्वाइन ही नहीं किए। यहां ओपीडी में रोजाना तीन सौ के आसपास मरीज आते हैं। फिलहाल कोरोना के मद्देनजर आईसोलेशन वार्ड बना दिया गया है। विदेश से आए तेरह यात्रियों को क्वारंनटाइन किया गया है।

By: Shakeel Niyazi

Published on:
31 Mar 2020 10:10 am
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