
Punjab Drug Crisis: पंजाब में नशे का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। बीजेपी की ओर से चल रही 'नशा मुक्त पंजाब यात्रा' के दौरान पार्टी नेता और राज्यसभा सांसद तरुण चुघ ने नशे के खिलाफ अपनी पार्टी का प्लान बताया। उन्होंने कहा कि इस लड़ाई में सिर्फ पुलिस या सरकार ही नहीं, बल्कि आम लोगों को भी साथ आना होगा।
चुघ ने कहा कि बीजेपी की ओर से पूरे पंजाब में लोगों को नशे के खिलाफ जागरूक किया जा रहा है। पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन की अगुआई में शुरू हुई यात्राएं गांवों और अलग-अलग इलाकों तक पहुंच रही हैं। इस दौरान नशे से प्रभावित परिवारों से भी मुलाकात की जा रही है।
तरुण चुघ ने कहा कि यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात उन माताओं से हुई, जिन्होंने नशे के कारण अपने बेटों को खो दिया। उन्होंने कहा कि इन परिवारों से मिलने पर पंजाब में नशे की समस्या का दर्द और ज्यादा समझ में आता है।
चुघ ने इस दौरान पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर भी निशाना साधा। उनका आरोप है कि सरकार नशे को रोकने में पूरी तरह सफल नहीं हुई है। उन्होंने सरकार पर साफ योजना और नीति नहीं होने का भी आरोप लगाया। ये बातें बीजेपी नेता ने अपने बयान में कही हैं।
बीजेपी ने इस अभियान के लिए पांच मुख्य बातें बताई हैं। पहली, नशा बेचने वाले लोगों के नेटवर्क को तोड़ना। दूसरी, नशे की सप्लाई रोकना, ताकि ड्रग्स पंजाब तक पहुंच ही न सके।
तीसरी बात नशे के कारोबार से आने वाले पैसे पर रोक लगाने की है। चौथे संकल्प में नशे की चपेट में आए युवाओं को बाहर निकालने, उनका इलाज कराने और उन्हें दोबारा सामान्य जिंदगी में लाने की बात कही गई है।
पांचवां संकल्प इस लड़ाई को सिर्फ सरकारी कार्रवाई तक सीमित नहीं रखने का है। बीजेपी इसे लोगों से जुड़ा अभियान बनाना चाहती है। पार्टी का कहना है कि युवाओं, परिवारों और समाज के दूसरे लोगों को भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए।
बीजेपी की 'नशा मुक्त पंजाब यात्रा' 18 सितंबर को पठानकोट से शुरू हुई थी। चार यात्राओं के जरिए पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों तक पहुंचने का कार्यक्रम है। इस यात्रा को करीब 4,000 किलोमीटर का सफर तय करना है और 30 सितंबर को जालंधर में इसका समापन होना है।
नशे के मुद्दे पर BJP और AAP के बीच राजनीतिक बहस भी चल रही है। BJP जहां मौजूदा सरकार पर सवाल उठा रही है, वहीं AAP की ओर से BJP के पुराने कार्यकाल को लेकर जवाब दिया जा रहा है। ऐसे में पंजाब में नशे का मुद्दा सामाजिक चिंता के साथ-साथ राजनीतिक बहस का भी बड़ा हिस्सा बन गया है।