कर्नाटक के गदग जिला के सिंगतालूर गांव में दलित समुदाय के लोगों के लिए एक सरकारी नाई की दुकान खोली गई। स्थानीय नाइयों द्वारा बार-बार बाल काटने से इनकार किए जाने के बाद यह कदम उठाया गया। सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट द्वारा खोली गई यह दुकान राज्य की पहली सरकारी नाई की दुकान मानी जा रही […]
कर्नाटक के गदग जिला के सिंगतालूर गांव में दलित समुदाय के लोगों के लिए एक सरकारी नाई की दुकान खोली गई। स्थानीय नाइयों द्वारा बार-बार बाल काटने से इनकार किए जाने के बाद यह कदम उठाया गया। सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट द्वारा खोली गई यह दुकान राज्य की पहली सरकारी नाई की दुकान मानी जा रही है।
बाल काटने से इनकार के बाद बढ़ा विवाद
स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ सप्ताह पहले विवाद तब शुरू हुआ जब गांव के एक नाई ने एक दलित लड़के के बाल काटने से मना कर दिया। इसके बाद अन्य नाइयों ने भी दलित समुदाय के लोगों को सेवा देने से इनकार कर दिया। अधिकारियों ने बताया कि नाइयों ने धार्मिक आधार पर अपने फैसले को सही ठहराने की कोशिश की। एक तालुक अधिकारी ने बताया कि हर साल देवता हडपड़ा समुदाय के घरों में आते हैं और नाइयों का दावा था कि वे इस दौरान दलितों की सेवा नहीं कर सकते। मामला बढऩे पर स्थानीय प्रशासन ने नाइयों और समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ कई शांति बैठकें कीं। तहसीलदार की मौजूदगी में चेतावनी दी गई, लेकिन इसके बावजूद नाइयों ने अपना रुख नहीं बदला।
प्रशासन की सख्ती, नई दुकान की शुरुआत
लगातार इनकार के बाद प्रशासन ने संबंधित दुकानों को नोटिस जारी कर बंद करने का आदेश दिया। इसके बाद कई नाइयों ने अपनी दुकानें बंद कर दीं। स्थिति को सामान्य करने के लिए सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट, तालुक प्रशासन, तालुक पंचायत, पुलिस डिपार्टमेंट, दलित समर्थक संगठन के सहयोग से नई सरकारी नाई की दुकान शुरू की गई। इस दुकान को इस तरह स्थापित किया गया है कि दलित सहित सभी समुदायों के लोग बिना किसी भेदभाव के सेवा ले सकें। हडपडा अप्पना समाज के एक नाई ने इसे संचालित करने की जिम्मेदारी स्वीकार की है, जबकि प्रशासन ने आवश्यक उपकरण और अन्य सामग्री उपलब्ध कराई है। प्रशासन का कहना है कि सामाजिक समानता और भेदभाव रहित सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए आगे भी कड़े कदम उठाए जाएंगे।