
कथा को केवल धार्मिक आयोजन के रूप में नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाले माध्यम के रूप में सुनना चाहिए। हृदय में प्रेम और मन में सकारात्मक दृष्टि हो तो भगवान श्रीराम के चरित्र और उनके आदर्शों को समझना आसान होता है। अयोध्या (उत्तरप्रदेश) से पधारीं कथावाचिका सुभद्रा कृष्णा ने यह बात कही। वे हुब्बल्ली के गब्बुर गली स्थित बाबा रामदेव भवन में आयोजित संगीतमय श्रीराम कथा में श्रद्धालुओं को कथा का रसपान करा रही हैं। श्रीराम कथा का आयोजन 22 अगस्त से शुरू हुआ है, जो 1 सितंबर तक चलेगा। कथा प्रतिदिन शाम 3 से 6 बजे तक हो रही है।
कथावाचिका सुभद्रा कृष्णा ने कहा कि व्यक्ति पर उसकी संगति का गहरा प्रभाव पड़ता है। मंदिर जाने से अच्छे लोगों का संग मिलता है और अच्छे विचार जीवन को नई दिशा देते हैं। सनातन परंपरा पूरे समाज को जीवन-व्यवस्था का संदेश देती है और पेड़-पौधों सहित प्रकृति में भी ईश्वर का भाव देखने की सीख देती है। उन्होंने धर्म और अध्यात्म को अलग-अलग बताते हुए कहा कि धर्म व्यक्ति को सही आचरण की राह दिखाता है, जबकि अध्यात्म की दृष्टि आत्मचिंतन और आत्मा की ओर ले जाती है। उन्होंने सत्य को स्वीकार करने और उसे जीवन में उतारने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
सुभद्रा कृष्णा ने पर्यावरण और नदियों के संरक्षण का संदेश देते हुए कहा कि हमने अपनी नदियों को प्रदूषित कर दिया है। केवल गंगा में डुबकी लगाने से धर्म पूरा नहीं होता, बल्कि गंगा की सेवा और उसकी स्वच्छता के लिए प्रयास करना भी आवश्यक है। प्रकृति का संरक्षण भी धार्मिक और सामाजिक जिम्मेदारी का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि पूर्व समय में साधु-संत वर्षों तक तपस्या करते थे। आज धार्मिक आयोजनों में सेवा की भावना को प्राथमिकता देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर भंडारे भी धार्मिक सेवा के बजाय केवल आयोजन या इवेंट की तरह होते जा रहे हैं।कथावाचिका ने श्रद्धालुओं से राम कथा को केवल सुनने तक सीमित नहीं रखने, बल्कि उसके संदेश को अपने आचरण में उतारने का आह्वान किया। उन्होंने प्रेम, सत्य, सेवा, सद्भाव और प्रकृति संरक्षण को जीवन का हिस्सा बनाने की प्रेरणा दी। इस अवसर पर युवा कार्यकर्ता केसाराम चौधरी हरजी, रामलाल जणवा चौधरी बाली, धर्मेन्द्र माली कोसेलाव समेत अन्य ने व्यवस्थाओं में सहयोग किया।