
हुब्बल्ली के कोटन मार्केट स्थित बाबा रामदेव मंदिर में घोड़े पर सवार बाबा रामदेव की प्रतिमा। मंदिर में रोज पूजा-पाठ के साथ ज्योत प्रज्वलित रहती है।
ओस्तवाल परिवार ने करवाया बाबा रामदेव मंदिर का निर्माण
मंदिर का निर्माण करीब तीन दशक पहले ओस्तवाल परिवार सिवाना की ओर से करवाया गया था। परिवार के सदस्यों के अनुसार उस समय कोटन मार्केट हुब्बल्ली का प्रमुख व्यापारिक क्षेत्र था। बड़ी संख्या में व्यापारी यहां कारोबार करते थे। व्यापारियों की धार्मिक आस्था को देखते हुए मर्चेन्ट एसोसिएशन ने मंदिर निर्माण के लिए स्थान उपलब्ध कराया। इसके बाद ओस्तवाल परिवार ने यहां बाबा रामदेव मंदिर का निर्माण करवाया।
व्यापारियों के बीच आस्था का केंद्र बना मंदिर
मंदिर निर्माण के बाद आसपास के व्यापारी कारोबार के साथ बाबा रामदेव के दर्शन के लिए यहां पहुंचते थे। बाजार में नजदीक होने के कारण मंदिर व्यापारियों के लिए पूजा और दर्शन का सहज स्थान बन गया। समय के साथ बाजार का स्वरूप बदला, लेकिन मंदिर के प्रति लोगों की आस्था कायम रही। मंदिर में बाबा रामदेव की मार्बल की प्रतिमा घोड़े पर सवार स्वरूप में स्थापित है। परिवार के अनुसार यह प्रतिमा जयपुर में विशेष रूप से तैयार करवाई गई थी। फूलों से सजे बाबा के दरबार में श्रद्धालु नियमित रूप से पूजा-अर्चना करते हैं।
बीज और दशम पर भजन-कीर्तन
बाबा रामदेव की आराधना में बीज और दशम के अवसर पर मंदिर में विशेष धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। इस दौरान पूजा-अर्चना के साथ भजन-कीर्तन होता है। श्रद्धालु सामूहिक रूप से बाबा रामदेव का स्मरण करते हुए अपनी आस्था प्रकट करते हैं।
संत तुलछाराम महाराज ने की थी प्रतिष्ठा
मंदिर की प्रतिष्ठा ब्रह्मधाम आसोतरा के गादीपति संत तुलछाराम महाराज के हाथों हुई थी। ओस्तवाल परिवार की संत खेताराम महाराज के प्रति भी विशेष आस्था है। इसी कारण मंदिर में संत खेताराम महाराज की तस्वीर भी स्थापित की गई है। बाबा रामदेव की भक्ति के साथ संत परंपरा से जुड़ाव मंदिर की धार्मिक पहचान को और मजबूत करता है।
अब मंदिर का हो रहा जीर्णोद्धार
करीब तीन दशक पुराना होने के कारण अब मंदिर के जीर्णोद्धार का काम चल रहा है। मंदिर में नई टाइल्स लगाने के साथ रंग-रोगन और सौंदर्यीकरण किया जाएगा। जीर्णोद्धार के बाद मंदिर का स्वरूप और अधिक आकर्षक एवं व्यवस्थित नजर आएगा।
Updated on:
22 Aug 2026 08:27 pm
Published on:
22 Aug 2026 08:27 pm
