हजारों संदिग्ध खातों की जांच शुरूसाइबर अपराध पर लगाम लगाने के लिए बल्लारी के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन (सीसीपीएस) ने म्यूल अकाउंट के खिलाफ विशेष अभियान शुरू किया है। ये ऐसे बैंक खाते होते हैं जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधी अवैध रूप से पैसे के लेन-देन और ठगी की रकम को छिपाने के लिए करते हैं। […]
हजारों संदिग्ध खातों की जांच शुरू
साइबर अपराध पर लगाम लगाने के लिए बल्लारी के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन (सीसीपीएस) ने म्यूल अकाउंट के खिलाफ विशेष अभियान शुरू किया है। ये ऐसे बैंक खाते होते हैं जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधी अवैध रूप से पैसे के लेन-देन और ठगी की रकम को छिपाने के लिए करते हैं। राज्य गृह विभाग ने पहली बार बेंगलूरु स्थित सीआईडी कार्यालय में अत्याधुनिक साइबर कमांड सेंटर स्थापित किया है, जो पूरे राज्य में ऐसे संदिग्ध खातों की पहचान और जांच कर रहा है। जांच के दौरान बल्लारी जिले में 4,596 म्यूल अकाउंट चिन्हित किए गए हैं। इनमें से 1,140 खाते विजयनगर जिले से संबंधित पाए गए, जिन्हें सत्यापन के लिए वहां की पुलिस को भेजा गया है। बाकी खातों की जांच बल्लारी पुलिस कर रही है।
पुलिस ने अब तक 175 खातों की केवाईसी जानकारी बैंकों से प्राप्त की है और उनमें से 40 खातों की गहन जांच की जा रही है। जांच के दौरान दो खातों में अवैध वित्तीय लेन-देन का पता चला है और इस मामले में तीन लोगों को आरोपी बनाया गया है।
लोन देने का झांसा देकर लोगों से ठगी
पुलिस के अनुसार साइबर अपराधी अक्सर कम आय वाले मजदूरों, घरेलू सहायकों और छोटे व्यापारियों को कमीशन का लालच देकर उनके नाम से बैंक खाते खुलवाते हैं। इन खातों के जरिए ऑनलाइन ठगी से प्राप्त रकम को कई चरणों में इधर-उधर भेजा जाता है और अंत में उसे किप्टोकरेंसी में बदल दिया जाता है। हाल ही में सामने आए दो मामलों में फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खोलकर लोन देने का झांसा देकर लोगों से ठगी की गई। इनमें से एक खाते का संबंध देशभर में दर्ज 35 साइबर ठगी मामलों से पाया गया, जबकि दूसरे मामले में 64.62 लाख रुपए के लेन-देन का पता चला है।