हुबली

किताबों से आगे सीखने की पाठशाला बना ‘अक्षर वनÓ, रायचूर के सरकारी शिक्षक ने स्कूल परिसर को बनाया ज्ञान का खुला संसार

सरकारी स्कूलों में आधुनिक शिक्षण संसाधनों की कमी के बीच कर्नाटक के रायचूर जिले के एक शिक्षक ने बच्चों के लिए सीखने का ऐसा अनूठा संसार तैयार किया है, जहां किताबों के साथ-साथ प्रकृति के बीच भी ज्ञान हासिल किया जा सकता है। लिंगसुगूर तालुक के केसरट्टी गांव स्थित सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक वीरेश तेरदल की पहल से स्कूल परिसर में 'अक्षर वनÓ विकसित किया गया है। यह पहल अब बच्चों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई है।
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रायचूर के केसरट्टी गांव स्थित सरकारी स्कूल परिसर में बनाया गया 'अक्षर वनÓ, जहां शिलापट्टों और दीवारों के माध्यम से बच्चों को रोचक तरीके से शिक्षा दी जा रही है।
रायचूर के केसरट्टी गांव स्थित सरकारी स्कूल परिसर में बनाया गया 'अक्षर वनÓ, जहां शिलापट्टों और दीवारों के माध्यम से बच्चों को रोचक तरीके से शिक्षा दी जा रही है।

48 शिलापट्ट लगाए
'अक्षर वनÓ में 48 शिलापट्ट लगाए गए हैं। इन पर विभिन्न धर्मों की शिक्षाओं, संतों और कवियों के विचारों के साथ प्रसिद्ध व्यक्तित्वों के प्रेरक संदेश अंकित किए गए हैं। स्कूल की दीवारों पर संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों और पाठ्यपुस्तकों के महत्वपूर्ण विषयों को भी चित्रित किया गया है। इसका उद्देश्य बच्चों को कक्षा से बाहर भी सीखने का अवसर देना और पढ़ाई को रोचक बनाना है।

अक्षरों के साथ जीवन की सीख
शिलापट्टों पर कन्नड़ वर्णमाला को पशु-पक्षियों, फलों और सब्जियों के चित्रों के साथ प्रदर्शित किया गया है। इससे छोटे बच्चों को अक्षर पहचानने और जल्दी सीखने में मदद मिलती है। कुछ शिलापट्टों पर यातायात संकेत और सड़क सुरक्षा के नियम भी बनाए गए हैं, ताकि बच्चों को छोटी उम्र से ही सुरक्षित यातायात व्यवहार की जानकारी मिल सके।

पढ़ाई की ओर आकर्षण
शिक्षक वीरेश तेरदल के अनुसार, उन्होंने 'अक्षर वनÓ इसलिए तैयार किया ताकि बच्चे स्कूल में प्रवेश करते ही पढ़ाई की ओर आकर्षित हों। इस पहल में शिक्षकों, स्कूल विकास एवं निगरानी समिति के सदस्यों और अभिभावकों ने भी सहयोग किया।

गरीब परिवारों के बच्चों को स्कूल से जोडऩे की कोशिश
'अक्षर वनÓ का एक उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के उन बच्चों को भी स्कूल की ओर आकर्षित करना है, जो किसी कारणवश शिक्षा से दूर रहते हैं। शिक्षा विभाग ने भी पाठ्यपुस्तकों से आगे बढ़कर प्रकृति के बीच जीवनोपयोगी बातें सिखाने वाली इस पहल की सराहना की है।

Updated on:
25 Aug 2026 09:19 pm
Published on:
25 Aug 2026 09:12 pm