हुबली

पांच दशक पहले बनाया भगवान सुमतिनाथ का मंदिर, मंदिर परिसर में पेंटिंग से गिरनार तीर्थ, शत्रुंजय तीर्थ, देलवाड़ा एवं अष्टापद महातीर्थ को उकेरा

सुमतिनाथ मूर्तिपूजक संघ की मेजबानी में होते हैं सुमतिनाथ जन्म कल्याणक महोत्सव समेत अन्य आयोजन

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रायचूर में सुमतिनाथ भगवान का मंदिर।

रायचूर (कर्नाटक) में करीब पांच दशक पहले भगवान सुमतिनाथ का मंदिर बनाया गया। संगमरमर से बना यह मंदिर आकर्षक हैं। यहां 14 स्वप्न की पेंटिंग मनमोहक है। भगवान सुमतिनाथ के साथ ही मंदिर परिसर में गौतम स्वामी, जिनदत्त सूरी, माता पदमावती एवं वीर मणिभद्र स्वामी की प्रतिमाएं भी हैं। इसके साथ ही हाथ से की गई पेंटिंग में गिरनार तीर्थ, शत्रुंजय तीर्थ, देलवाड़ा, अष्टापद महातीर्थ को उकेरा गया है।

आदिनाथ भगवान जन्म कल्याणक महोत्सव
सुमतिनाथ जन्म कल्याणक महोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। भगवान महावीर स्वामी जन्म कल्याणक भी उत्साह के साथ मनाते हैं। इस दौरान शोभायात्रा निकाली जाती हैं। शोभायात्रा मंदिर परिसर से रवाना होकर पटेल रोड, कपड़ा बाजार, महावीर सर्किल समेत अन्य मार्गों से होते हुए निकाली जाती है। शांतिनाथ भगवान जन्म कल्याणक महोत्सव के साथ ही आदिनाथ भगवान जन्म कल्याणक महोत्सव भी मनाया जाता है।

मंदिर के पास ही आराधना भवन
यहां मूर्तिपूजक समाज के करीब सौ परिवार निवास कर रहे हैं जिसमें गुजराती, ओसवाल एवं गोरवाल शामिल है। मंदिर में रोजाना पूजा, आरती एवं अन्य धार्मिक आयोजन होते हैं। मंदिर के पास ही आराधना भवन बना हुआ है। रायचूर-हैदराबाद मार्ग पर राजेन्द्र सूरीश्वर का मंदिर निर्माणाधीन है जो करीब दो साल में पूरा होगा।

छह दशक से आ रहे
सुमतिनाथ मूर्तिपूजक संघ के अध्यक्ष प्रकाशमल चौरडिय़ा नोखा ने बताया कि अधिकांश परिवार नागौर, जालोर व बालोतरा जिले समेत अन्य स्थानों से हैं। समाज के लोग करीब छह दशक से आने शुरू हुए। गुजरात से भी कई परिवार यहां आकर बसे है।

नियमित अंतराल से चातुर्मास
सुमतिनाथ मूर्तिपूजक संघ के ट्रस्टी रंजीतराज कटारिया रूण ने बताया कि यहां समय-समय पर चातुर्मास का आयोजन भी किया जाता है। पिछले वर्ष यहां कीर्तनप्रभाश्री आदि ढाणा-तीन का चातुर्मास आयोजित किया गया था।

Published on:
03 Oct 2024 02:04 pm
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