रायपुर

CG History: रायपुर को राजधानी बनाने के पीछे है कई कहानियां, प्राचीन मंदिर बताते हैं गौरवशाली इतिहास की गाथा

Raipur History: रायपुर को राजधानी बनाने के पीछे कई कहानियां है। खासकर शहर की पुरानी बसावट, तालाब और यहां की प्राचीन मंदिरों की कहानियां रायपुर के गौरवशाली इतिहास की गाथाओं को दर्शाती है।

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Jun 03, 2023
CG History: रायपुर को राजधानी बनाने के पीछे है कई कहानियां, प्राचीन मंदिरों बताते हैं गौरवशाली इतिहास की गाथा

Raipur History: रायपुर . रायपुर को राजधानी बनाने के पीछे कई कहानियां है। खासकर शहर की पुरानी बसावट, तालाब और यहां की प्राचीन मंदिरों की कहानियां रायपुर के गौरवशाली इतिहास की गाथाओं को दर्शाती है। इतिहास के आईने में आज आप जानेंगे कि पुरानी बस्ती का नाम पुरानीबस्ती कब और कैसे पड़ा।

Raipur History: इतिहासकार आचार्य रामेंद्रनाथ मिश्र ने अपनी खोज से पुरानी बस्ती के अतीत को बताया। इतिहासकार ने बताया, रायपुर की पुरानी बसाहटों में सबसे पहला नाम पुरानीबस्ती का है। करीब 600 साल पहले कल्चुरी शासक राजा ब्रह्मदेव राय का शासन था। तब किले के समीप ही ब्रम्हपुरी और पुरानीबस्ती थी।

Raipur History: ब्रम्हपुरी में किले के अधिकारी और कर्मचारी रहते थे। इससे लगे पुरानी बस्ती में व्यापार समेत अन्य कामों के लिए अलग-अलग समाज के लोग रहते थे। तब से पुरानीबस्ती में अनेक समुदाय के लोगों की बसाहट रही है। कल्चुरी के बाद मराठा शासक भोंसले ने यहां आधिपत्य जमा लिया। यहां राजा-महाराजाओं के जमाने की बस्ती होने की वजह से यहां धनेली बाड़ा, शास्त्री बाड़ा, छुरा बाड़ा जैसे अनेक बाड़े मौजूद हैं।

समाज के नाम पर कई मोहल्ले

Raipur History: पुरानी बस्ती में जितने भी मोहल्ले है वो सभी आज भी समाज के नाम से जाने जाते हैं। जानकारों की मानें तो इसमें यादवों से गोपियापारा, कायस्थ से कायस्थपारा, लोधी से लोधीपारा, धीवरों से धीवरपारा, अमीन पारा, मैथिलपारा(टुरी हटरी), जहां से लोग व्यापार करते थे। वहीं महामाया मंदिर होने की वजह से महमाईपारा नाम हो गया। इस क्षेत्र में दर्जन भर से अधिक मोहल्ले हैं। पुरानी बस्ती राष्ट्रीय चेतना आंदोलन का केंद्र रहा था।

शिक्षा की यहां से हुई शुरुआत

Raipur History: रमेंद्र नाथ मिश्र के अनुसार पुरानी बस्ती होने के कारण यहां सबसे पहले व्यापार समेत अन्य गतिविधियों की शुरुआत हुई। सबसे पहले शिक्षा की शुरुआत भी यहीं से हुई है। संस्कृत का ज्ञान विद्वानों ने यहां के मंदिरों से अर्जित किए हैं। वहीं व्यापारिक दृष्टिकोण से भी यह इलाका चर्चित था। यहां की गलियों की भी अपनी एक गाथा है। अंग्रेजों के खिलाफ जारी जंग में भी जब स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को अंग्रेज सैनिक गिरफ्तार करने आते तो गलियों से ही बच जाते थे।

Updated on:
03 Jun 2023 03:02 pm
Published on:
03 Jun 2023 02:51 pm
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