कोरोना एक्टिव केस का शतक, 34 मरीज भर्ती, 66 होम आइसोलेट-बीते 24 घंटे में 16 कोरोना रोगी फिर आए सामने, चार दिन में 64 मरीज मिले,जनता की लापरवाही : अब भी सोशल डिस्टेंस और मॉस्क का उपयोग नहीं
खरगोन. जिले में कोरोना ने फिर से रफ्तार पकड़ ली है। आठ मार्च से 12 मार्च तक 64 कोरोना रोगियों की पुष्टि हुई। शुक्रवार को भी 16 मरीज मरीज मिले। संक्रमित मरीजों के साथ एक्टिव केस की गति भी बंदूक से निकली गोली की तरह तेज हो गई है। देखते ही देखते एक्टिव केस का शतक पूरा हो गया है। जिले में फिलहाल 100 एक्टिव केस है। इसमें 15 एक्टिव केस जिला अस्पताल के सामान्य वार्डों में भर्ती है, 19 इंदौर रेफर है जबकि 66 को होम आइसोलेट किया गया है।
कोरोना की बढ़ती रफ्तार के बीच लापरवाही भी खुलकर सामने आ रही है। आम जनता दो गज दूरी और मॉस्क लगाने के नियमों का पालन नहीं कर रही वहीं प्रशासन कोरोना की रोकथाम के लिए अब भी कोई सख्त कदम नहीं उठा पाया है। जिला अस्पताल का कोविड आईसीयू अब भी बंद पड़ा है। कोविड केयर सेंटर्स पहले ही बंद कर दिए हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र से आने वालों की सैंपलिंग तो हो रही है लेकिन वह भी होम आइसोलेट का पालन नहीं कर रहे। भीड़ का जमावड़ा और मॉस्क की अनदेखी डरावनी तस्वीर बना रहे हैं।
चार दिन में 64 मरीज आए
आठ मार्च को जिले में 13 कोरोना रोगियों की पुष्टि की गई। इसके अगले ही दिन 9 मार्च को 15, दस मार्च को 19, ग्यारह मार्च को 17 और 12 मार्च को 16 कोरोना संक्रमितों की पहचान की गई है।
खरगोन में 16 मरीज मिले
24 घंटे में 16 व्यक्ति कोरोना से संक्रमित हुए। 7 व्यक्ति स्वस्थ्य होकर घर लौटे। जिले में कोरोना रोगियों की संख्या 5642 हो गई है। इनमें 5432 मरीज स्वस्थ्य होकर डिस्चार्ज हो चुके है। अब तक 110 लोगों की मौत हुई है। 100 मरीज एक्टिव है। 24 घंटे में 176 सैंपलों की नेगेटिव रिपोर्ट आई। 264 नए सेंपल जांच के लिए भेजे हंै। जिले में 24 कंटेनमेंट एरिया है।
यह अनदेखी पड़ेगी भारी
सख्ती कमजोर : चालानी कार्रवाई बिल्कुल बंद कर दी गई है। होम आइसोलेट लोग बिना रोक-टोक खुलेआम घुम रहे हैं।
टूट रहे नियम : बाजार में भीड़ बढऩे लगी है। नियम बनाने वाले अफसरों के कार्यालयों में ही सेनेटाइजर, मॉस्क और दो गज दूरी का पालन नहीं हो रहा।
जनता में भ्रम, अब नहीं है कोरोना
जनता में यह भ्रम है कि अब कोरोना नहीं है। वैक्सीन आ चुकी है। लोगों की यह चूक बड़े खतरे को बढ़ाने वाली है। इसके इतर स्वास्थ्य विभाग की सैंपलिंग भी घटी है। वैक्सीनेशन की रफ्तार अब भी धीमी है।