इंदौर

छात्र प्रदर्शन पर प्रतिबंध, लोकतंत्र का गला घोंटने की साजिश

दोनों छात्र संगठन आदेश से नाराज, एबीवीपी ने उच्च शिक्षा मंत्री को सौंपा ज्ञापन
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Mar 10, 2019
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इंदौर. कॉलेज और यूनिवर्सिटी में छात्र संगठनों के धरने-प्रदर्शन पर रोक के आदेश पर प्रदेश के दोनों प्रमुख छात्र संगठन सरकार के खिलाफ खड़े हो गए हैं। छात्र पदाधिकारियों ने इसे लोकतांत्रिक आवाज का गला घोंटने की साजिश करार देते हुए पुनर्विचार की मांग की है। उच्च शिक्षा मंत्री को ज्ञापन सौंपने के अलावा मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष को चिट्ठी भेजी गई। प्रदेश में कांग्रेस सरकार आने के बाद डीएवीवी राजनीति का अखाड़ा बनी हुई है। एनएसयूआई, युवा कांग्रेस के साथ कांग्रेस ने भी कई प्रदर्शन कर कुलपति, अफसरों व शिक्षकों से बदसलूकी की। शैक्षणिक परिसर में नेतागीरी और गुंडागर्दी पर नियंत्रण के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने धरने-प्रदर्शन, रैली, नारेबाजी और राजनीतिक आंदोलन पर रोक के आदेश जारी किए हैं। शनिवार को एबीवीपी के डीएवीवी इकाई अध्यक्ष करण मूलचंदानी ने उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी को ज्ञापन सौंपा। करण ने कहा, यह आदेश छात्रों के मौलिक अधिकारों का हनन है। सरकार आदेश वापस नहीं लेगी तो एबीवीपी छात्रहित में हर कदम उठाएगी।

लोकसभा में नुकसान
एनएसयूआई पदाधिकारियों का कहना है, भाजपा राज में यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में अफसरशाही हावी हो गई थी। एनएसयूआई छात्रों की समस्या के समाधान के लिए आवाज उठाती आई है। पूर्व प्रवक्ता पंकज प्रजापति ने मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को चिट्ठी भेजकर विरोध दर्ज कराया। प्रजापति ने लिखा है, आदेश वापस नहीं लिया तो छात्रों की नाराजगी से लोकसभा चुनाव में नुकसान उठाना पड़ेगा।

घोषणा पत्र में किया था शिक्षकों का सम्मान लौटाने का वादा
विधानसभा चुनाव के लिए जारी कांग्रेस के घोषणा पत्र में शैक्षणिक परिसरों में राजनीति खत्म करने के साथ शिक्षकों का सम्मान लौटाने का वादा किया था। इसका कारण भाजपा राज में कॉलेज और यूनिवर्सिटी में छात्र संगठनों की मनमानी बताया गया था। हालांकि इसमें यह नहीं था कि छात्रहित में आवाज उठाने वालों पर कानूनी कार्रवाई हो।

Updated on:
10 Mar 2019 12:59 pm
Published on:
10 Mar 2019 12:58 pm