इंदौर

15 नवंबर तक जीएसटी, वैट और आयकर रिटर्न में उलझे रहेंगे कारोबारी

पेनल्टी की उलझन में कारोबारी इंदौर. जीएसटी में राहत के बाद भी बीते तीन माह के रिटर्न की उलझन में 40 प्रतिशत से ज्यादा कारोबारी बुरी तरह उलझ गए हैं।
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Updated: 23 Oct 2017, 10:20 AM IST
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इंदौर. जीएसटी में राहत के बाद भी बीते तीन माह के रिटर्न की उलझन में 40 प्रतिशत से ज्यादा कारोबारी बुरी तरह उलझ गए हैं। जुलाई-अगस्त-सितंबर तक 60 से 65 प्रतिशत कारोबारी ही जीएसटी भरने में सफल रहे हैं। जो नहीं भर सके उन पर पेनल्टी का बोझ आ गया है। यदि सरकार ने 31 मार्च तक पेनल्टी नहीं लेने की मांग को नजरअंदाज किया तो प्रदेश के कारोबारियों को करोड़ों रुपए का फटका लग सकता है। इनसे बचने की जुगत में लगे कारोबारियों के सामने और भी कई मुसीबतें खड़ी हैं, जैसे वैट के डीम्ड असेसमेंट की अंतिम तारीख भी 31 अक्टूबर है।
दरअसल, जीएसटी में कारोबारियों को हर माह रिटर्न भरने के लिए सरकार ने 20 तारीख तय की है। रिटर्न भरने में कठिनाइयों को देखते हुए सरकार ने सबसे पहले अनुमानित रिटर्न भरने की प्रक्रिया लागू की। इसके बाद जीएसटीआर-1 व 2 भरने की तिथियां तय की गईं। दूसरी ओर रिटर्न भरने में आ रही मुश्किलों को देखते हुए जीएसटी काउंसिल ने अनुमानित जीएसटीआर-३ बी भरने का प्रावधान किया है। काउंसिल का कहना था, यह व्यवस्था दिसंबर तक हर माह लागू रहेगी। इसके तहत जारी शेड्यूल में देरी पर पेनल्टी या लेट फीस को दो माह के लिए माफ किया गया है। बावजूद इसके सितंबर के ३बी रिटर्न में अगस्त में हुई देरी की पेनल्टी लगकर आ रही है। इस पर वाणिज्यिक कर विभाग के अफसर चुप्पी साधे हुए हैं। टैक्स प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशंस के पदाधिकारियों का कहना है, जब सरकार ने अगस्त की पेनल्टी में छूट की व्यवस्था की है तो फिर पेनल्टी कैसे लग रही है? इस विसंगति को दूर करना चाहिए।
पहले माइग्रेशन, अब पेनल्टी में उलझे : तकनीकी मुश्किलों की वजह से देश के अनेक कारोबारी पहले तो माइग्रेशन में ही उलझ गए। पेन नंबर से मिस मैच, फर्म के नाम से मुश्किल, रिजेक्ट होने का कारण नहीं मिलने से परेशान होते रहे। इससे अनेक कारोबारी जुलाई व अगस्त का रिटर्न नहीं भर सके। अब पेनल्टी की उलझन में फंसे हैं।

डीम्ड असेसमेंट के लिए 8 दिन : जीएसटी रिटर्न भरने की आपाधापी के बीच कारोबारियों को 31 अक्टूबर तक आवेदन कर वर्ष 2015-16 का डीम्ड असेसमेंट करना है। जानकारी के अनुसार अभी तक 20 प्रतिशत के आवेदन भी नहीं पहुंचे हैं। इसके लिए गत सप्ताह तारीख बढ़ाने की मांग करते हुए टैक्स प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन ने सरकार को चि_ी भी लिखी है।

आमने सामने
कारोबारियों का कहना है, विरोध के बाद भी सभी ने किसी न किसी तरह से प्रक्रिया में शामिल होने के प्रयास किए, लेकिन जीएसटीएन नेटवर्क, पोर्टल और सॉाफ्टवेयर की व्यावहारिक कमियों से समय पर रिटर्न समिट नहीं कर सके। अब इसका खामियाजा पेनल्टी के रूप में भुगतना पड़ेगा। वहीं अफसरों का मानना है, अब व्यवस्थाएं सुधर रही हैं। जब 60 प्रतिशत से अधिक कारोबारी भर सकते हैं तो शेष को भी परेशानी नहीं आना चाहिए। कुछ कारोबारी जानबूझकर रिटर्न नहीं भरना चाहते।

यह है मुश्किल की तारीखें
- डीजल-पेट्रोल-गैस व नॉन-जीएसटी आइटम्स पर वैट की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर।
- ट्रान वन के लिए अंतिम तिथि 31 अक्टूबर।
- जीएसटीआर-2 की अंतिम तिथि।
- कंपोजिशन वाले कारोबारियों का रिटर्न 15 नवंबर।
-आयकर असेसमेंट अंतिम तिथि।

एेसे हो रही उलझन
जुलाई- जुलाई का अनुमानित रिटर्न 20 अगस्त तक भरा जाना था। पहला माह होने से इसे बढ़ाकर बाद में इस पर पेनल्टी भी माफ कर दी गई। -अगस्त- अगस्त का जीएसटी आर ३बी २० सितंबर तक भरा जा चुका है। 10 नवंबर तक इस माह का भी जीएसटी आर-1 भरना होगा, वरना इसमें भी कारोबारी पेनल्टी के दायरे में आ जाएंगे। साथ ही अगस्त में जिन कारोबारियों ने लेट फीस के साथ रिटर्न समिट किए, उनके समिट होने में लगे समय की पेनल्टी भी सितंबर के साथ मांगी गई है।
सितंबर- जीएसटीआर-3बी समिट करने की अंतिम तिथि निकल चुकी है। कारोबारी अब 200 रुपए प्रतिदिन की पेनल्टी के साथ रिटर्न भर रहे हैं।

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