इंदौर

दुनिया के प्रतिष्ठित लोगों में एक बात कॉमन, उन्होंने पीएचडी भारत से की है

आइआइएम में एक्सीलेंस इन रिसर्च एंड एजुकेशन पर कॉन्फ्रेंस में बोले आइआइएम डायरेक्टर

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May 05, 2018

इंदौर . आइआइएम में चार दिनी नौवीं कॉन्फ्रेंस ऑन एक्सलेंस इन रिसर्च एंड एजुकेशन (सीइआरइ) का उद्घाटन समारोह शुक्रवार को हुआ। इसमें विभिन्न राउंड टेबल परिचर्चा, वर्कशॉप्स और की-नोट संबोधन होंगे। आइआइएम डायरेक्टर प्रो. ऋषिकेश टी कृष्णन ने प्रभावशाली अकादमिक कॅरियर निर्माण विषय पर बोलते हुए कॉन्फ्रेंस की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि ज्ञान को बढ़ाने और विभिन्न डोमेन के विशेषज्ञों और विद्वानों के साथ अनुसंधान कार्य साझा करने में कॉन्फ्रेंस मदद करेगी। उन्होंने प्रेजेंटेशन की शुरुआत क्विज से की, जिसमें दुनिया के प्रतिष्ठित व्यक्तियों की तस्वीरें साझा की और पूछा कि वे प्रसिद्ध क्यों थे? फिर उन्होंने कहा कि सभी के बीच एक कॉमन बात यह है कि इन्होंने अपनी पीएचडी भारत से की है।
उन्होंने कहा कि विदेश से पीएचडी की डिग्री हासिल करना जरूरी नहीं है। आप भारत में ही अपनी शिक्षा पूरी कर सकते हैं और विदेश में किसी भी अन्य विद्वान और शोधकर्ता के समान ही कुशल हो सकते हैं। यह सब आपके अच्छे काम और शिक्षा के उपयोग पर निर्भर करता है। तीसरे दिन शनिवार को जॉय ऑफ रिसर्च पर वर्कशॉप और राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस होगी।
राउंड टेबल चर्चा
पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप- अकादमिक शोध एजेंडा का विकास विषय पर आइआइटी मद्रास के प्रो. अश्विन महालिंगम ने राउंड टेबल चर्चा की। इसमें आइआइएम बेंगलूरु निदेशक प्रो. जी रघुराम, एलएंडटी सीइओ शैलेश पाठक शामिल हुए। प्रो. महालिंगम ने पासपोर्ट सेवा केंद्र और स्थायित्व की आवश्यकता के उदाहरण साझा किए। प्रो. रघुराम ने एनपीए और विभिन्न परियोजनाओं में पीपीपी पर बात कही। साथ ही मुंबई मेट्रो के निर्माण के दौरान आई समस्याओं का उदाहरण देते हुए मध्यस्थता के विभिन्न मुद्दों को साझा किया। एलएंडटी सीइओ पाठक ने कहा कि 1860-1880 के दौरान के भारतीय रेलवे का पीपीपी मॉडल सबसे ज्यादा सफल रहा है। भारत-चीन के पीपीपी मॉडल पर चर्चा करते हुए सलाह दी कि दोनों देशों की तुलना न करें क्योंकि दोनों संस्कृति और उद्योग में अलग है।

टिचिंग थ्रू स्टोरीज
पार्टिसिपेंट्स ने टिचिंग थ्रू स्टोरीज वर्कशॉप भी अटेंड की। अकादमिक व फैकल्टी, डीन प्रो. कमल के जैन ने लीडरशिप और निगोसिएशन क्षेत्र की रोचक कहानियों को साझा किया और प्रतिभागियों को बताया कि कहानियों के माध्यम से दर्शकों को कैसे आकर्षित करना प्रभावी हो सकता है।
पेपर डवलपमेंट
सेकंड सेशन में कनाडा के अल्बर्टा विश्वविद्यालय के प्रो. बिल फोस्टर ने पेपर डवलपमेंट पर कार्यशाला की। उन्होंने सिद्धांत संचालित शोध के बारे में बात की। एकेडमी ऑफ मैनेजमेंट लर्निंग एंड एजुकेशन (एएमएलई) जर्नल में लेख प्रकाशित संबंधी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अनुसंधान में उभरते विचार परिणाम बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।
रिसर्च मैथोडोलॉजी
गुरुवार को हुई प्री कॉन्फ्रेंस में इएसएसइसी सिंगापुर कैंपस के असिस्टेंट प्रो. अरिजीत चटर्जी ने रिसर्च मैथोडोलॉजी पर वर्कशॉप ली। उन्होंने ज्ञान के तार्किक औचित्य, सीमांकन की समस्या आदि विषयों पर चर्चा की। शोध को दिलचस्प बनाने आदि प्रबंधनीय सिद्धांतों के बारे में बात की।

Published on:
05 May 2018 02:14 pm
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