MP News: हालात ऐसे बने कि महज दो दिनों में ही ईवी की डिमांड करीब 20 प्रतिशत तक बढ़ गई और कई शोरूम में स्टॉक खत्म होने की स्थिति बन गई।
MP News: पेट्रोल-डीजल की कमी की अफवाह का असर ऑटोमोबाइल बाजार में भी देखने को मिल रहा है। बड़ी संख्या में लोगों का रुझान इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) की तरफ बढ़ा है। शोरूम पर अचानक ग्राहकों की भीड़ नजर आने लगी है। करीब 20 फीसदी डिमांड बढ़ गई है। कुछ शो रूम पर तो स्टॉक भी खत्म हो गया। एजेंसी बुकिंग कर रही है। डिलीवरी बाद में दी जाएगी। पेट्रोल-डीजल की कमी की अफवाह ने बाजार का ट्रेंड पलट दिया है। पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारों के चलते इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) शोरू्स पर अचानक ग्राहकों की भीड़ उमड़ पड़ी।
हालात ऐसे बने कि महज दो दिनों में ही ईवी की डिमांड करीब 20 प्रतिशत तक बढ़ गई और कई शोरूम में स्टॉक खत्म होने की स्थिति बन गई। ऑटोमोबाइल कारोबारियों के मुताबिक सामान्य दिनों में शहर में हर महीने करीब 400 कारें बिकती हैं, जिनमें लगभग 10 प्रतिशत हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक वाहनों की रहती है, लेकिन इस अफवाह के बाद ग्राहकों का रुझान तेजी से ग्रीन एनर्जी की ओर मुड़ गया है।
जो लोग पहले पेट्रोल-डीजल गाडिय़ों की बुकिंग कर रहे थे, वे अब सीधे ईवी के विकल्प तलाश रहे हैं। ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन के महासचिव विशाल पमनानी बताते हैं कि पिछले दो दिनों में ईवी की पूछताछ और बुकिंग में जबर्दस्त उछाल आया है। कई शोरूम में ग्राहकों को वेटिंग दी जा रही है। क्योंकि उनका कहना है कि अगर यह ट्रेंड कुछ दिन और जारी रहा, तो ईवी सेगमेंट को बड़ा बूस्ट मिल सकता है।
दिलचस्प बात यह है कि हाल ही में ब्रजेश्वरी क्षेत्र में हुए एक हादसे के बाद ईवी की मांग में करीब 4 फीसदी की गिरावट आई थी। लोग थोड़े सतर्क हो गए थे, लेकिन जैसे ही ईंधन संकट की चर्चा फैली ग्राहक दोबारा इलेक्ट्रिक गाडिय़ों की ओर लौट आए।
ईवी खरीदने वालों के लिए एक और अहम पहलू टैक्स छूट से जुड़ा है। फिलहाल इलेक्ट्रिक वाहनों पर टैक्स में राहत मिल रही है, लेकिन यह छूट खत्म होने की कगार पर है। अगर ऐसा होता है तो करीब 4 फीसदी टैक्स लगने से गाडिय़ां महंगी हो सकती हैं। हालांकि, परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस छूट को जारी रखने के लिए शासन स्तर पर चर्चा की जा रही है और संभावना है कि सरकार पहले की तरह राहत जारी रखे। कुल मिलाकर, इंदौर में मौजूदा हालात एक दिलचस्प तस्वीर पेश कर रहे हैं, एक तरफ अफवाह से पैदा हुआ डर और दूसरी तरफ उसी डर से उभरता ग्रीन ट्रेंड। बाजार में यह बदलाव बताता है कि कभी- कभी खबर से ज्यादा असर अफवाह का होता है।