MP News: मध्य प्रदेश में पहली बार कोर्ट में तलाक का ऐसा मामला आया....खामोश सुनवाई में रिश्ते की गूंज दूर तक गई...मगर फैसला फिर टल गया।
MP News:इंदौर कुटुंब न्यायालय में शनिवार को लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस दौरान तलाक के एक मामले में पहली बार खामोश सुनवाई में रिश्ते की गूंज दूर तक गई…मगर फैसला फिर टल गया। दरअसल कोर्ट में मूक-बधिर दंपती के मामले में कोर्ट में साइन लैंग्वेज एक्सपर्ट अतुल राठौर और ज्ञानेंद्र पुरोहित बतौर मध्यस्थ पेश हुए और दंपती को समझाने की कोशिश की। पति तो साथ रहने के लिए मान गया, लेकिन पत्नी ने सहमति नहीं दी है। कोर्ट ने उन्हें समय देते हुए जून में दोबारा सुनवाई का निर्णय लिया है।
कुटुंब न्यायालय में लोक अदालत के लिए पांच पीठों का गठन किया गया था। लोक अदालत का शुभारंभ प्रधान न्यायाधीश धीरेंद्र सिंह, अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश एके गोयल, प्रथम अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश डॉ. कुलदीप जैन, तृतीय अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश तजिंदर सिंह अजमानी एवं द्वितीय अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश सुरेश कुमार चौबे ने दीप प्रज्वलन कर किया। कुटुंब न्यायालय के नाजिर राकेश गुप्ता ने बताया कि लोक अदालत में 456 मामले रखे गए थे, जिनमें से 99 प्रकरणों का आपसी समझौते के बाद निराकरण हो गया। 7 पति-पत्नी साथ रहने के लिए कोर्ट से ही रवाना हुए।
मालवा मिल निवासी 30 वर्षीय समीरा (परिवर्तित नाम) का 2017 में एमआइजी कॉलोनी निवासी 35 साल के आरिफ गौरी (परिवर्तित नाम) से निकाह हुआ था। दोनों की 8 और 3 साल की बेटियां हैं। शादी के कुछ समय बाद दोनों में मनमुटाव शुरू हुआ तो ससुराल एवं मायका पक्ष में भी मतभेद होने लगे। बात मारपीट तक पहुंच गई। पत्नी को शक था कि पति के अन्य महिला से संबंध हैं। 2023 में वह बच्चों सहित मायके में रहने लगी और परिवार न्यायालय में भरण-पोषण का केस लगाया। 3 साल से चल रहे केस के दौरान कई बार उनकी काउंसलिंग की गई। इस दौरान पति को अपनी गलती का एहसास हुआ एवं उसने पत्नी एवं बच्चों को अच्छे से रखने का आश्वासन दिया। पुरानी गलती न दोहराने का भी वचन देकर लोक अदालत में प्रकरण समाप्त करवाया। इसके बाद दोनों कोर्ट से ही घर के लिए रवाना हुए। प्रकरण में पैरवी वकील शिवांगी चौकसे और प्रीति मेहना ने की। सुनवाई डॉ. कुलदीप जैन, प्रथम अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश की कोर्ट में हुई।
बजरंग नगर निवासी 21 साल की सपना चौहान (परिवर्तित नाम) का विवाह उज्जैन निवासी ड्राइवर विकास चौहान (परिवर्तित नाम) से अप्रेल 2024 में हुआ था। शादी के कुछ समय बाद ससुराल में मतभेद, अभद्र व्यवहार होने से पत्नी नवंबर 2024 में मायके आ गई। उसने 2025 में कुटुंब न्यायालय में केस(Divorce) दायर किया। सुनवाई के दौरान दोनों को समझाइश दी, जिससे दोनों साथ रहने को तैयार हुए। दोनों ने लोक अदालत से केस समाप्त करवाया। वकील संजय पवार ने पैरवी की। कोर्ट धीरेंद्र सिंह, प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय की थी।
आजाद नगर निवासी 42 साल की रुबीना बानो (परिवर्तित नाम) का 20 साल पहले होशंगाबाद के 48 वर्षीय हुसैन वाहिद (परिवर्तित नाम) से निकाह हुआ था। कुछ साल पहले दोनों में विवाद के बाद पत्नी मायके आ गई और भरण-पोषण का केस दायर किया। न्यायालय ने पति को 4 हजार रुपए प्रतिमाह देने के आदेश जारी किए। 2025 में तलाक(Divorce का केस दायर किया। कोर्ट ने दोनों पक्षों को साथ रहने की समझाइश दी तो पत्नी तैयार हो गई। लोक अदालत में पेश होकर दोनों साथ रहने के लिए रवाना हुए। प्रकरण में पैरवी वकील मीना प्रजापति ने की। कोर्ट तजिंदर सिंह अजमानी, तृतीय अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश की थी।