इंदौर

Ganesh Chaturthi: देश के सबसे अमीर मंदिरों में से एक है ‘खजराना गणेश मंदिर’, सफाई के मामले में भी है सबसे आगे

भक्तों की हर मनोकामना को पूर्ण करने के लिए तो यह मंदिर जाना जाता है....  

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Sep 09, 2021
Khajrana Ganesh Mandir

इंदौर। शहर का खजराना गणेश मंदिर न केवल देश बल्कि विश्वभर में प्रसिद्ध है। 286 साल पहले यानी 1735 में यह मंदिर बना था। भक्तों की हर मनोकामना को पूर्ण करने के लिए तो यह मंदिर जाना जाता है, देश के सबसे स्वच्छ शहर का यह मंदिर साफ-सफाई में भी अव्वल है। चाहे मंदिर प्रांगण में बनी भोजन शाला हो या यहां स्थित प्रसाद की दुकानें परिसर में कहीं पर भी गंदगी देखने को नहीं मिलती। मंदिर की प्रतिमा स्वयं भू है। ऐसा कहा जाता है कि स्थानीय पंडित मंगल भट्ट को भगवान ने स्वप्न में आकर मंदिर निर्माण करने का आदेश दिया था।

अहिल्याबाई ने करवाया था निर्माण

कहा जाता है कि पंडित मंगल भट्ट को जब भगवान ने स्वप्न में मंदिर निर्माण का आदेश दिया, तो उन्होंने अपने सपने के बारे में सभी को बताया। यह बात रानी अहिल्याबाई तक पहुंची और उन्होंने स्वप्न में बताई जगह पर खुदवाई करवाई। वहां से गणेश प्रतिमा प्राप्त हुई। प्रतिमा को उठाने की कोशिश उल्टा की गई, पर वह हिली नहीं। तब पंडित भट्ट को बुलाया गया और उनके हाथ लगाते ही प्रतिमा उठ गई। इसके बाद यहां मंदिर इच्छा भग निर्माण करवाया गया।

उल्टा स्वास्तिक बनाते हैं भक्त

मान्यता है कोई भक्त गणेश मंदिर में अपनी मनोकामना लेकर जाता है, तो उल्टा स्वास्तिक बनाने से उसकी मनोकामना पूरी होती है। भक्त अपनी इच्छा भगवान गणेश को बताकर मंदिर की पीछे की दीवार पर उल्टा स्वास्तिक बना जाते हैं। मन्नत पूरी हो जाती है तो फिर उसे सीधा करते हैं।

परिसर में हैं 33 मंदिर

खजराना गणेश मंदिर परिसर में 33 छोटे-बड़े मंदिर बने हुए हैं। यहां भगवान राम, शिव, मां दुर्गा, साईं बाबा, हनुमानजी, गायत्री माता, शनि मंदिर सहित अनेक देवी-देवताओं के मंदिर हैं। पीपल का प्राचीन पेड़ है जिसे मनोकामना पूर्ण करने वाला पेड़ माना जाता है।

भगवान श्रीगणेश को पहला निमंत्रण

इंदौर शहर के भक्त कोई भी शुभ काम से पहले खजराना मंदिर में जाकर भगवान गणपति को निमंत्रित करते हैं। वहीं यहां पर भक्त नया वाहन, जमीन या मकान खरीदने पर मंदिर माथा टेककर भगवान का आशीर्वाद लेते हैं।

फूल और नारियल से बनती है जैविक खाद

प्रदूषण को दूर करने के लिए मंदिर में चढ़ने वाले फूल और नारियल से यहां जैविक खाद बनाई जा रही है। वहीं होली पर फूलों को सुखाकर रंग भी तैयार किया जाता है।

Published on:
09 Sept 2021 06:20 pm
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