डेवलपर्स क्रेडिट से वंचित रहा तो उपभोक्ताओं पर आएगा बोझ
इंदौर. रियल एस्टेट कारोबारियों, बिल्डर्स व डेवलपर्स के लिए रेरा में रजिस्ट्रेशन के लिए ३१ दिसंबर आखिरी तारीख है। वहीं उनके सामने इससे पहले जीएसटी के मामले में एक नई उलझन सामने आ गई है।
ऑनगोइंग प्रोजेक्ट पर जीएसटी व पूर्व में चुकाए गए वैट व सर्विस टैक्स के रिटर्न मामलों में असमंसज की स्थिति है। ट्रान-१ फॉर्म में एक साल पहले की क्रेडिट क्लेम का प्रावधान नहीं होने से सारा मामला उलझ गया है। अफसर इसका निराकरण करने के लिए विशेषज्ञों के साथ माथापच्ची कर रहे हैं। तीन माह से मामला काउंसिल के सामने है, लेकिन निराकरण के कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं हुए। अब मात्र २ दिन का समय बचा है। इसके बाद बिल्डर्स डेवलपर्स के लिए क्रेडिट लेने का अवसर समाप्त हो जाएगा और खामियाजा उपभोक्ता उठाएंगे।
... तो आएगी मुश्किल
रियल एस्टेट कारोबार पर राज्य सरकार वैट व स्टाम्प शुल्क व केंद्र सरकार सर्विस टैक्स लेती थी। इसकी गणना डेवलपर्स अपने हिसाब से करके उपभोक्ता वसूल लेते थे। जीएसटी में आने के बाद पहली मुश्किल तो जमीन के मूल्य सहित गणना पर आई। सरकार ने इसे दुरूस्त किया तो अब मामला एक साल से चल रहे कई ऑनगोइंग प्रोजेक्ट में क्रेडिट रिफंड का मामला उलझ गया है। जीएसटीएन सॉफ्टवेयर के ट्रान-१ फार्म में प्रावधान नहीं होने से विभाग ने भी चुप्पी साध ली है। जबकि जीएसटी अधिनियम की धारा १४२ के सब सेक्शन में नियमानुसार छूट का उल्लेख है, लेकिन नियम ११८ में स्पष्टता नहीं होने से मुश्किल आ रही है। एमपी टैक्स लॉ बार एसोसिएशन के एके लखोटिया के अनुसार समय रहते कदम नहीं उठाए तो विभाग व डेवलपर्स दोनों मुश्किल में आ जाएंगे।
धारा 171 में फंसेंगे
१. सेक्शन १४० के मुताबिक यदि डेवलपर्स के पास ३० जून से पहले का कोई स्टाक एक वर्ष पुराना न हो और इस पर एक्साइज या कस्टम दी गई हो तो जीएसटी में कोई छूट का प्रावधान नहीं है। ऐसे में तो ट्रान-१ भरने पर क्रेडिट मिलगी, पर वह छूट नहीं।
२. यदि क्रेडिट ले ली है तो सेक्शन १७१ के प्रावधान में उसे उपभोक्ता को लौटाना होगा। यानी किसी बिल्डर या डेवलपर्स ने ऑनगोइंग प्रोजेक्ट के २० फीसदी स्टॉक पर छूट ले ली तो असेसमेंट के समय सेक्शन १७१ एंटी प्रॉफिटिंग क्लॉज के चलते उसे इसका लाभ खरीदार को देना होगा तथा शेष प्रोजेक्ट पर १८ फीसदी जीएसटी देना होगा।
३. मानों किसी प्रोजेक्ट का ७० फीसदी काम पूरा हो गया है। एेसे में प्रोजेक्ट में खरीदे गए माल पर तो वैट चुकाया है। इसके विक्रय से १० फीसदी राशि ही वापस मिली है।
(विशेषज्ञ सुनील पी जैन के अनुसार)