टीसीएस जहां तय समय सीमा तक काम भी शुरू नहीं कर सकी वहीं इंफोसिस ने काम बंद कर दिया है ...
इंदौर न्यूज टुडे . अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर बदल रही नीतियों की वजह से आईटी कंपनियों के व्यापार में लगातार गिरावट आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की सख्ती के बाद भारत में जीएसटी और नोटबंदी ने आईटी कंपनियों को मंदी की ओर धकेल दिया है। इंफोसिस और टीसीएस की इंदौर में शुरू हुई यूनिट भी इन नीतियों का शिकार हो गई हैं। दोनों ही कंपनियों ने यहां पर हजारों युवाओं को रोजगार देने का दावा किया था लेकिन अब इन दोनों का काम बंद होता नजर आ रहा है। मध्यप्रदेश में टीसीएस जहां तय समय सीमा तक काम भी शुरू नहीं कर सकी वहीं इंफोसिस ने काम शुरू करने के बाद अब बंद कर दिया है। देश की शीर्ष आई कंपनियों के काम बंद करने की वजह ेसे अब हजारों लोगों के भविष्य पर सवालिया निशान लग गया है।
जीएसटी में 18 प्रतिशत टैक्स का झटका
पहले ही मंदी से जूझ रही आईटी इंडस्ट्री पर जीएसटी के बाद 18 प्रतिशत टैक्स थोप दिया गया है। एप डेवलपमेंट, वेबसाइट डिजाइनिंग और सॉफ्टवेयर डिजाइनिंग पर अब 18 प्रतिशत का टैक्स देना है जिसकी वजह से कारोबार में लगातार कमी आ रही है। इन सभी वजहों से आईटी कंपनियां बंद हो रही हैं या फिर अपना कारोबार समेटने पर मजबूर हैं।
कम हुआ फायदा, सैलरी निकालना भी मुश्किल
इंदौर की बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी टेक इंपल्स टेक्नोलॉजी के डायरेक्टर मनीष पांचाल ने बताया कि सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री पर लग रहे टैक्स और अंतरराष्ट्रीय नीतियों में बदलाव की वजह से प्रॉफिट मार्जिन बहुत कम हो गया है। एक प्रोजेक्ट पर लाखों रुपए का टैक्स जाता है जिससे उसकी कॉस्ट भी बहुत बढ़ जाती है। इससे कर्मचारियों की सैलेरी और प्रोजेक्ट का प्रॉफिट भी प्रभावित होता है। पहले ही प्रोजेक्ट अब कम हो गए हैं और नीतियों में बदलाव के चलते इससे बिजनेस बहुत प्रभावित हो रहा है।
इंदौर में बंद हुई इंफोसिस, टीसीएस का कारोबार हुआ जीरो
हाल ही में इंदौर में शुरू हुई इंफोसिस की यूनिट ने काम बंद कर दिया है और इससे हजारों लोगों के भविष्य पर सवालिया निशान लग गए हैं। इंफोसिस ने यहां पर हजारों लोगों को नौकरी देने का दावा किया था और बड़े जोर शोर से इसे शुरू करने की तैयारियां चल रहीं थी। वहीं दूसरी ओर टीसीएस ने तो अब तक काम भी नहीं शुरू किया है और आंकड़ों के मुताबिक न तो कुछ निवेश किया गया है और न ही किसी को रोजगार दिया जा रहा है।
न निवेश हुआ न रोजगार दे पाए
डिविजनल कमिश्नर सेज इंदौर के दफ्तर से जो आंकड़े मिले हैं, उनसे साफ है कि आईटी कंपनियां काफी पिछड़ गई हैं और नया निवेश करने से बच रही हैं। इंदौर में सुपर कॉरिडोर पर करीब 230 एकड़ जमीन लेकर बैठीं टीसीएस और इन्फोसिस ने तय समयसीमा में कैंपस डेवलपमेंट पूरा किया ना ही निर्धारित निवेश हुआ और न रोजगार दे पाईं।
सेज की मंजूरी की शर्तों के अनुसार दोनों कंपनियों को इसी साल मार्च में संचालन शुरू करना था। टीसीएस ने तो संचालन शुरू ही नहीं किया, इन्फोसस ने जरूर कुछ काम दिखाया और एक्सपोर्ट के नाममात्र के आंकड़े बताकर काम बंद कर दिया। अगस्त तक की बैलेंस शीट के मुताबिक टीसीएस का कारोबार जीरो है और इन्फोसिस का कारोबार उतना ही है, जितना पहले महीने में बताया था, तीन लाख। इसमें अब भी 14 कर्मचारी ही काम करना बताए जा रहे हैं।
केवल इम्पेट्स का कारोबार ही बढ़ा
इम्पेटस ने इस साल मार्च में संचालन शुरू कर दिया था। इंदौर में आईटी सेक्टर में केवल इसी कंपनी का कारोबार बढ़ रहा है। पिछले वित्तीय वर्ष में कंपनी का एक्सपोर्ट जहां 91 लाख था, वहीं इस साल अगस्त तक 1.21 करोड़ का है। हालांकि कंपनी भी पूरी तरह से ऑपरेशनल नहीं है। फिलहाल 30 कर्मचारी ही काम कर रहे हैं, जबकि कंपनी का लक्ष्य ढाई हजार लोगों को रोजगार देने का है।
काम चल रहा, लेकिन दिखावे के लिए
दोनों कंपनियों का दावा था कि अक्टूबर, 17 तक पूरी तरह से संचालन शुरू हो जाएगा, लेकिन अमेरिका में प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप के आईटी कंपनियों को लेकर दिए गए आदेश के बाद कैंपस डेवलपमेंट से ही हाथ खींच लिया। अब वहां काम चल तो रहा है, लेकिन केवल दिखावे के लिए। जिस हिसाब से काम चल रहा है, उससे लगता नहीं कि एक साल से पहले संचालन शुरू हो पाएगा।