6 माह से विभाग में घूम रहा प्रारूप, वित्त मंत्री ने दी मंजूरी
इंदौर. जीएसटी लागू होने के 10 माह बाद आखिरकार कारोबारियों को रिफंड देने का रास्ता साफ हो गया। मंत्री द्वारा प्रक्रिया के प्रारूप पर हस्ताक्षर करने के बाद सोमवार को वाणिज्यिक कर विभाग ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया। अब कारोबारियों को क्लेम की गई रिफंड की करीब 200 से 300 करोड़ की राशि मिल सकेगी, लेकिन विभागों के बीच लेटलतीफी का खामियाजा सरकार को भुगतना होगा। जीएसटी कानून के अनुसार रिफंड आवेदन की समयसीमा 90 दिन से अधिक हो गई होगी तो सरकार ६ प्रतिशत सालाना ब्याज भी देना पड़ेगा।
जीएसटी में स्टेट जीएसटी का रिफंड जुलाइ से ही अटका है। सी व आइ जीएसटी के लिए तो प्रक्रिया निर्धारित होकर रिफंड समय पर मिल रहा है। राज्य जीएसटी का मसला वित्त विभाग की आपत्ति के चलते १० माह से अटका था। वित्त विभाग को ट्रेजरी से राशि वापस करने की प्रक्रिया बनाकर नोटिफिकेशन जारी करना था। वाणिज्यिक कर विभाग ने इसका प्रारूप बनाकर भी दे दिया, लेकिन इसे सोमवार को वित्त मंत्री की मंजूरी के बाद जारी किया गया। राज्य कर आयुक्त राघवेंद्र सिंह के अनुसार अब विभाग व कोषालय के बीच एक व्यवस्था बनने से रिटर्न समय पर मिल सकेंगे।
कई कंपनियों का रिफंड अटका
जुलाई से जीएसटी लागू करने के बाद से ही अनेक कंपनियों का एसजीएसटी की राशि का रिफंड अटका है। सरकार ने रिफंड राशि क्लेम करने की शुरुआत सितंबर-अक्टूबर में की थी। भुगतान के लिए प्रकरण भेजने पर मामला ट्रेजरी में अटक गया। जानकारों के अनुसार, रिफंड आवेदन के बाद यदि 90 दिन में भुगतान नहीं करने पर सरकार द्वारा 6 प्रतिशत ब्याज देने का कानून में प्रावधान किया गया है। दिसंबर से पहले के सभी प्रकरणों में ब्याज देना पड़ सकता है, क्योंकि देरी सरकार की प्रक्रिया के चलते हुई है। अफसरों का तर्क है, एेसे बहुत कम प्रकरण होंगे, क्योंकि आवेदन की विंडो ही सितंबर-अक्टूबर में शुरू की गई है। अधिकांश आवेदन इसके बाद ही किए गए हैं। टैक्स लॉ बार एसोसिएशन अध्यक्ष अश्विन लखोटिया व सचिव केदार हेड़ा का कहना है, व्यापारियों की राशि अटकने से कारोबार प्रभावित हो रहा था। प्रक्रिया बनने से राशि मिलने लगेगी। आवेदन के बाद 90 दिन से अधिक के भुगतान प्रकरणों में ब्याज देने की मांग की जाएगी।