
Indore High Court decision: अदालत में जो बच्ची अपनी बात स्पष्ट और बगैर किसी शंका के रखने में सक्षम हो, जो कॅरियर को लेकर फोकस्ड और भविष्य को लेकर सजग हो, उसके सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। बालिका के भविष्य को लेकर ये टिप्पणी हाईकोर्ट की युगलपीठ ने की। कोर्ट 14 वर्षीय लड़की की इच्छा को महत्व देते हुए उसकी कस्टडी पिता और बड़ी बहन को सौंप दी। हालाकि उन्हें निर्देश भी दिया कि बच्ची की सुरक्षा सुनिश्चित करने को उसे दोनों मोबाइल फोन दिलाएंगे, जिसमें टीआइ का फोन नंबर रहेगा, ताकि किसी भी शिकायत की स्थिति में वह पुलिस से संपर्क कर सके।
अभिभाषक प्रतीक माहेश्वरी ने बताया कि हाईकोर्ट में नाबालिग बालिका की कस्टडी के लिए बड़ी बहन और पिता ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। इसमें कहा गया था कि जिला बाल संरक्षण अधिकारी और बाल विकास समिति अध्यक्ष ने नौवीं कक्षा में अध्ययनरत बालिका को मां की शिकायत पर अवैध रूप से कब्जे में लेते हुए जीवन ज्योति आश्रम भेज दिया है। सुनवाई के दौरान ये बात सामने आई कि मां ने पिता के खिलाफ वर्ष 2021 में मारपीट और बेटियों के केस दर्ज कराया था। हालाकि ट्रायल कोर्ट में दोनों बेटियों के बयान और जिरह हो चुकी है, जहां बेटियों ने आरोपों को नकार दिया।
इसके बाद बेटियां पिता के साथ रह रही थीं लेकिन मां की शिकायत के बाद छोटी नाबालिग बेटी को बाल संरक्षण अधिकारियों ने जीवन ज्योति आश्रम भेज दिया था। पिता-बहन की ओर से दावा किया गया था कि बच्ची को उसकी इच्छा विरुद्ध आश्रम में रखा गया है। वह जेईई की तैयारी कर रही है। आश्रम में रखने से उसकी पढ़ाई का नुकसान हो रहा है। वहीं कोर्ट में मां की ओर से इसका विरोध करते हुए कहा गया कि ट्रायल कोर्ट में दोनों बेटियों ने पिता के खिलाफ गंभीर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे, इसलिए हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।
जस्टिस सुबोध अभ्यंकर व जस्टिस आलोक अवस्थी की युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान नाबालिग बच्ची, उसकी बड़ी बहन और मां से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की। छोटी बेटी ने साफ कहा कि, वह पिता और बड़ी बहन के साथ रहना चाहती है। पिता ने उसके साथ कभी दुर्व्यवहार नहीं किया, बल्कि पढ़ाई और अन्य आवश्यकताओं का पूरा ध्यान रखा। मां के कहने पर पिता के खिलाफ झूठे आरोप लगाए थे।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि बच्ची की बड़ी बहन, जो स्वयं भी मामले में कथित पीड़िता है, पिता के साथ रह रही है। बीटेक के बाद नौकरी कर रही है, उसने भी कोर्ट में बयान दिया कि पिता ने दोनों बहनों का अच्छे से पालन-पोषण किया व मां के दबाव में उनसे झूठे आरोप लगवाए गए थे। कोर्ट माना कि दोनों बेटियां पर्याप्त ने समझदार, करियर को लेकर गंभीर और स्वयं निर्णय लेने में सक्षम हैं। बड़ी बहन पहले से पिता के साथ रह रही है और अब छोटी बेटी ने भी पिता-बहन के साथ रहने की इच्छा व्यक्त की है। ऐसे में न्यायालय को हस्तक्षेप करने में कोई संकोच नहीं है।
हाई कोर्ट ने मां के कहने पर पिता के खिलाफ दायर केस जो निचली अदालत में चल रहा है, उस पर इस केस के असर को लेकर भी साफ कर दिया है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में साफ कर दिया कि ट्रायल कोर्ट में लंबित आपराधिक मामले को लेकर गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है और न ही इसका असर उस पर पड़ेगा। निचली अदालत की सुनवाई स्वतंत्र रूप से कानून के अनुसार जारी रहेगी।