
MP First Double Decker Flyover (14 डंपरों ने परखी डबल डेकर ब्रिज की ताकत Photo Source- Patrika)
Indore News : सूबे का आर्थिक शहर इंदौर जल्द ही रफ्तार में एक कदम और बढ़ाने जा रहा है। शहर को मध्य प्रदेश के पहले डबल डेकर ब्रिज की सौगात मिलने वाली है। ये फ्लाईओवर लवकुश चौराहे पर लगभग बनकर तैयार है, जो अब आम लोगों के लिए खुलने के बेहद करीब है। करीब 250 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हो रहे इस ब्रिज की मजबूती और भार वहन क्षमता जांचने के लिए बुधवार से लोड टेस्ट शुरू किया गया।
परीक्षण के तहत ब्रिज पर 14 डंपर खड़े कर उसकी संरचनात्मक क्षमता का परीक्षण किया गया। अगर सभी तकनीकी मानक संतोषजनक पाए जाते हैं तो अगले सप्ताह ब्रिज को ट्रायल के तौर पर यातायात के लिए खोल दिया जाएगा। इसके बाद औपचारिक लोकार्पण किया जाएगा।
इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) की निगरानी में चल रहे इस परीक्षण के दौरान इंजीनियरों ने तय स्थानों पर डंपर खड़े कर विशेष उपकरणों से लगातार तकनीकी माप लिए। परीक्षण का उद्देश्य ये जानना है कि, अधिक भार पड़ने पर ब्रिज में कितना डिफ्लेक्शन (झुकाव) आता है और उसकी संरचना निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप है या नहीं। डंपर गुरुवार तक ब्रिज पर ही खड़े रहेंगे ताकि विभिन्न चरणों में परीक्षण पूरा किया जा सके।
लोड टेस्ट के दौरान इंजीनियर आधुनिक माप उपकरणों और सेंसर की सहायता से बार-बार रीडिंग ले रहे हैं। अलग-अलग बिंदुओं पर भार का प्रभाव मापा जा रहा है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पुल भविष्य में भारी यातायात का दबाव सुरक्षित रूप से सहन कर सके। विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी बड़े पुल को आम जनता के लिए खोलने से पहले इस प्रकार का परीक्षण अनिवार्य होता है।
यह डबल डेकर ब्रिज भविष्य में इंदौर के सबसे व्यस्त यातायात मार्गों में शामिल होगा। अनुमान है कि इसके शुरू होने के बाद प्रतिदिन एक लाख से अधिक वाहन इसका उपयोग करेंगे। इससे सुपर कॉरिडोर, मेट्रो कॉरिडोर और उज्जैन रोड के बीच यातायात अधिक सुगम होगा तथा प्रमुख चौराहों पर दबाव कम होने की उम्मीद है।
ब्रिज का महत्व केवल शहर के नियमित ट्रैफिक तक सीमित नहीं है। आगामी सिंहस्थ के दौरान उज्जैन जाने वाले लाखों श्रद्धालुओं और वाहनों के लिए भी यह पुल अहम भूमिका निभाएगा। इससे इंदौर-उज्जैन मार्ग पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा और यात्रा अधिक तेज व सुरक्षित बन सकेगी।
करीब 70 फीट ऊंचा यह डबल डेकर ब्रिज इंजीनियरिंग की दृष्टि से भी विशेष परियोजना माना जा रहा है। यह मेट्रो ट्रैक और सुपर कॉरिडोर पर बने पुल के ऊपर से गुजरते हुए सीधे उज्जैन रोड से जुड़ता है। इसके मध्य भाग में दोनों ओर विशाल स्पैन पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं। इन स्पैन को लगाने के लिए विशेष क्षमता वाली क्रेन और अत्याधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक का उपयोग किया गया था। अब लोड टेस्ट की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय होगा कि ब्रिज को यातायात के लिए पूरी तरह सुरक्षित घोषित किया जाए या नहीं। रिपोर्ट अनुकूल रही तो अगले सप्ताह ट्रायल रन शुरू होगा।
-परियोजना लागत: 250 करोड़ रुपए
-ब्रिज की ऊंचाई: लगभग 70 फीट
-लोड टेस्ट: 14 डंपरों के साथ दो चरणों में परीक्षण
-अनुमानित यातायात: प्रतिदिन 1 लाख से अधिक वाहन
-विशेषता: मेट्रो ट्रैक और सुपर कॉरिडोर के ऊपर से गुजरते हुए उज्जैन रोड से सीधा संपर्क
-विशेष उपयोग: सिंहस्थ के दौरान भी बड़ी संख्या में वाहनों की आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण
Updated on:
09 Jul 2026 10:03 am
Published on:
09 Jul 2026 10:03 am
