
CM Udyam Kranti Yojana (मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना- Photo Source- Patrika)
MP News: मध्य प्रदेश के युवाओं को स्वरोजगार देने के मामले में छोटे शहरों ने मेट्रो सिटी को भी पछाड़ दिया है। मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना (एमएमयूकेवाय) के चालू वित्त वर्ष 2026-27 की रिपोर्ट के अनुसार, 72.36 करोड़ रुपए के बैंक ऋण वितरित किए गए। इनमें इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर जैसे बड़े शहरों का प्रदर्शन अपेक्षाओं पर खरा नहीं रहा। उद्योग संचालनालय की शुरुआती तिमाही रिपोर्ट में 927 हितग्राहियों को स्वरोजगार से जोडऩे आर्थिक सहायता मिलना बताया गया है। इनमें सतना, कटनी और रीवा जैसे जिलों ने बेहतर प्रदर्शन कर यह संकेत दिया है कि, स्वरोजगार के प्रति छोटे शहरों के युवाओं में उत्साह और पहल अधिक दिखाई दे रही है।
प्रदेश में सतना ने सबसे उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए 58 मामलों में 4.99 करोड़ रुपए का ऋण वितरित किया और पहला स्थान हासिल किया। जबकि, इंदौर में जून तक केवल 40 मामलों में 2.61 करोड़ रुपए, भोपाल में 32 मामलों में 3.03 करोड़ रुपए का ऋण वितरित हो सका। विभाग के जानकार बताते हैं कि, युवाओं में अभी स्वरोजगार को लेकर जागरूकता में कमी भी है तो कुछ ऐसे भी मामले सामने आते हैं, जिसमें विभाग और बैंकर्स के चक्कर में युवाओं को लाभ नहीं मिला।
प्रदेश की आर्थिक और प्रशासनिक राजधानी कहलाने वाले इंदौर और भोपाल युवाओं को स्वरोजगार से जोडऩे में छोटे जिलों से भी पीछे रहे। सतना में सबसे ज्यादा 58 मामले तो कटनी ने 31 प्रकरणों के बावजूद 4.20 करोड़ रुपए बांटे हैं, जो लोन राशि के मामले में पूरे प्रदेश में दूसरे नंबर पर है। हैरानी की बात ये है कि, रीवा में 49 प्रकरणों में 2.88 करोड़ रुपए का वितरण कर इंदौर-भोपाल को कड़ी टक्कर दी है। वहीं, दूसरी तरफ अलीराजपुर (1 मामला, 5 लाख) और शाजापुर (1 मामला, 25 लाख) पूरे मध्य प्रदेश में सबसे फिसड्डी साबित हुए हैं। स्वरोजगार योजनाओं से जुड़ने को लेकर युवाओं में अभी जागरूकता की कमी भी दिखी है।
मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना शिक्षित युवाओं को खुद का व्यवसाय या उद्योग शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता और बैंक ऋण प्रदान करने वाली एक प्रमुख स्वरोजगार योजना है। इसके तहत विनिर्माण (मैन्युफैश्चरिंग) उद्योग के लिए 1 से 50 लाख रुपए तक साथ ही सेवा-व्यापार के लिए 1 से 25 लाख तक का ऋण दिया जाता है। आवेदक की आयु 18 से 40 वर्ष के बीच और परिवार की वार्षिक आय 12 लाख रुपए से अधिक नहीं होनी चाहिए।
जिला-----स्वीकृत प्रकरण------वितरित ऋण
-सतना------------58------------------4.99
-रीवा--------------49------------------2.88
-इंदौर-------------40-----------------2.61
-भोपाल-----------32-----------------3.03
-कटनी------------31-----------------4.20
-ग्वालियर---------21-----------------1.57
-जबलपुर----------15-----------------1.49
-आलीराजपुर-------01----------------0.05
-शाजापुर-----------01………………0.25
मध्य प्रदेश स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज ऑर्गनाइजेशन के महासचिव विपिन जैन का कहना है कि, ये आंकड़े गवाही हैं कि, असली जोखिम लेने और आत्मनिर्भर बनने का जज्बा अब बड़े महानगरों में नहीं, बल्कि छोटे जिलों के युवाओं में है। सतना और कटनी ने साबित कर दिया कि, सही मौका मिले तो छोटे शहर बड़े - बड़ों को पानी पिला सकते हैं। इंदौर-भोपाल जैसे औद्योगिक गढ़ों का सुस्त पड़ना अफसरों और बैंकर्स की नाकामी है। शासन की ऐसी योजनाओं के प्रति जागरूकता लाने के प्रयास किए जाने चाहिए, इसके लिए एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति हो जो इस जिंमेदारी का निर्वहन कर सके।
Updated on:
10 Jul 2026 02:02 pm
Published on:
09 Jul 2026 06:55 am
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