अब नर्सिंग कॉलेजों को वेबसाइट पर करना होंगी फोटो अपलोड चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय ने दिए निर्देश
इंदौर।
प्रदेश में नर्सिंग कॉलेजों में फर्जीवाडा़ सामने आया है। इतना ही नहीं हाईकोर्ट ने 93 कॉलेजों की मान्यता भी निलंबित किए जाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद प्रदेश के चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय (एमपीएमएसयू) जबलपुर ने अपने संबद्ध कॉलेजों को विवि की वेबसाइट पर अब अपने यहां की बुनियादी ढांचे यानी बिल्डिंग, लैब आदि के फोटो अपलोड करने को कहा है। इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं।
बता दें कि इंदौर में भी अक्षर सहित अन्य नर्सिंग कॉलेज सामने आए थे। जहां के फर्जीवाड़े की शिकायत छात्रों ने जनसनुवाई में दर्ज कराई थीं। जांच के दौरान कॉलेज तबेले में लगता पाया गया था। इसके साथ ही कई गंभीर अनियमिताएं पाई गई थीं। इसी प्रकार हाई कोर्ट जबलपुर में भी नर्सिंग कॉलेजों में व्याप्त गड़बडि़यों को लेकर मामला चल रहा है। जिसमें इंदौर के भी कुछ कॉलेजों में भारी अनियमिताएं सामने आई हैं। कॉलेज की फैकल्टी अन्य जिलों के कॉलेजों में भी पाए गए हैं। भारी गड़बड़ी सामने आने के बाद और कोर्ट का सख्त रुख देकर विवि के अधिकारियों ने कामकाज में पारदर्शिता लाए जाने के उद्देश्य व मान्यता के साथ उनके द्वारा उल्लेखित कॉलेजों के आवश्यक बुनियादी ढ़ांचे को तय करने के लिए अब उनके फोटो वेब साइट पर अपलोड कराए जाने जैसे कदम उठाए गए हैं।
शिकायत मिलने पर उठाए गए कदम
इधर, एमपीएमएसयू रजिस्ट्रार डॉ. प्रभात बुढोलिया का कहना है कि हमें नर्सिंग और पैरामेडिकल कॉलेजों के खिलाफ कई शिकायतें मिल रही हैं। इनके पास आवश्यक बुनियादी ढांचा नहीं है या गलत तरीकों से मान्यता ली है। हमने सिस्टम को पारदर्शी बनाने का फैसला किया है, जो छात्रों को प्रवेश लेने से पहले वेबसाइट पर कॉलेज की स्थिति की जांच करने में मदद करेगा। हम कॉलेजों को एक निश्चित प्रारूप में भवनों, कक्षाओं और प्रयोगशालाओं सहित बुनियादी ढांचे की तस्वीरें अनिवार्य रूप से अपलोड करने का आदेश जारी करने जा रहे हैं। वेबसाइट पर भी जरूरी बदलाव किए जाएंगे।
संस्थानों से मांगे सुझाव
दूसरी ओर एमपीएमएसयू के कुलपति डॉ. अशोक खंडेलवाल ने भी संस्थानों और कॉलेजों को पत्र लिखकर विश्वविद्यालय के कामकाज को दुरस्त करने और समय पर परीक्षा आयोजित किए जाने के साथ ही जल्द परिणाम जारी करने के लिए शैक्षणिक कैलेंडर का सख्ती से पालन करने के लिए सुझाव मांगे हैं।