इंदौर

लुट गई पंढरीनाथ मंदिर की जमीन, पांच साल बाद जागा प्रशासन

एजीपी बोले लापरवाह अफसरों के खिलाफ की जाए कार्रवाई ...

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Apr 07, 2018
pandarinath mandir indore land court issue

इंदौर . पंढरीनाथ मंदिर की देपालपुर के चार गांवों में कीमती जमीन है, जिस पर निजी व्यक्ति ने अपना हक जताकर केस लड़ा। पांच साल पहले हाई कोर्ट में शासन को हार का सामना करना पड़ा। अपील की जानी थी, लेकिन नहीं की। अब जब फाइल खुली तो भी आधे मन से, जिस पर एजीपी ने दोषी अफसरों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

पंढरीनाथ मंदिर की देपालपुर तहसील के ग्राम भिड़ोता की सर्वे नंबर ५३२ की ६.२५ हेक्टेयर, सुनाला की सर्वे नंबर ६३७, खिमलावदा की सर्वे नंबर ४२८ व बिरगोदा की सर्वे नंबर १३ की जमीन है। इन जमीनों को लेकर हाई कोर्ट में द्वितीय अपील पेश की गई थी, जिसका केस चल रहा था। किसी ने इसे अपना बताकर मालिकाना हक जताया था। सभी जमीन खेती की और कीमती हैं।

कोर्ट ने ९ अप्रैल २०१३ को मामले का निराकरण कर दिया। इसमें जिला प्रशासन को मुंह की खानी पड़ी। इसके बावजूद प्रशासन की तरफ से कोई अपील नहीं की गई और फाइल को दबा दिया गया। दो महीने पहले अचानक सामने आ गया। आदेश के संबंध में तहसीलदार देपालपुर ने पांच वर्ष की लंबी अवधि के बाद अभिमत मांगने के लिए २१ फरवरी २०१८ को अतिरिक्त महाधिवक्ता मनोज द्विवेदी के यहां पत्र पेश किया।

पत्र लिखने के बाद तहसीलदार भूल गए कि आगामी कार्रवाई भी करना है। तहसीलदार ने न तो आदेश ९ अप्रैल २०१३ की प्रतिलिपि के साथ भिजवाए और न ही व्यक्तिगत रूप से पेश होकर अभिमत प्राप्त करने के लिए संपर्क किया गया।

दोषियों पर हो कार्रवाई
अतिरिक्त महाधिवक्ता द्विवेदी ने कलेक्टर निशांत वरवड़े को पत्र लिखा है। कहा है कि आदेश के खिलाफ आगामी कार्रवाई में विलंब के लिए जिम्मेदार व प्रभारी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाना चाहिए। भविष्य में शासन की अतिमहत्वपूर्ण जमीन जैसे प्रकरण में संबंधित अधिकारी व सक्षम अधिकारी द्वारा लापरवाही न की जा सके।

गौरतलब है कि सरकारी जमीन के ऐसे कई मामले हैं, जिनमें अफसरों की लापरवाही की वजह से प्रशासन करोड़ों रुपए की जमीन का केस कोर्ट में हारा।

Published on:
07 Apr 2018 03:20 pm