
इंदौर. देश में इंदौर ग्रामीण को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ ) होने का तमगा मिल गया है, लेकिन शौचालय निमार्ण में जमकर भ्रष्टाचार हुआ। महू तहसील की ग्राम पंचायत बेरछा में हुए घोटाले का खुलासा जनपद पंचायत महू सीईओ कंचन डोगंरे द्वारा की गई जांच में हुआ है।
अब दोषियों को नोटिस दिए जाने की तैयारी है। पंचायत में सरपंच से लेकर जिम्मेदारों की मिलीभगत से 48 शौचालय में से 15 कागजों में ही बना डाले। शेष 33 शौचालय में भी जमकर भ्रष्टाचार हुआ। खुद ग्रामीणों ने जेब से राशि लगाकर अधूरे शौचालय को पूरा कराया।
दरअसल, साल 2015 में स्वच्छ भारत अभियान के तहत ग्राम पंचायत बेरछा में 48 शौचालय मंजूर हुए। इनमें ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों ने 15 शौचालय कागजों पर ही बना दिए। शेष 33 शौचालय के लिए गड्ढे खोदे गए और हितग्राहियों में किसी को ईंट, किसी को रेत, किसी को सीमेंट तो किसी को शीट मुर्गा दिया गया था।
शेष सामग्री हितग्राही खुद ही लेकर आए। इतना ही नहीं, अधिकांश में हितग्राही दरवाजे तक खुद खरीद कर लाएं। बता दें कि सरकार ने एक शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार रुपए की राशि मंजूर की है। इस लिहाज से 5,76,000 की राशि मंजूर की गई।
जांच अधिकारी ने जांच में 43,900 रुपए की सामग्री वितरण पाया। अब बाकी के 4,32,100 रुपए की राशि दोषियों से वसूली किए जाने की अनुशंसा की गई है।
जांच रिपोर्ट सौंप दी है
&जांच में बेरछा पंचायत में शौचालय की राशि में गोलमाल का खुलासा हुआ है। जांच रिपोर्ट सौंप दी गई है।
कंचन डोंगरे, सीईओ, जपं महू
ये पाए गए दोषी, अब होगी कार्रवाई
सरंपच : सुमनबाई धारा 40 के तहत नोटिस दिया जा रहा है। धारा 92 के तहत राशि वसूली होगी।
तत्कालीन सचिव: बाबूलाल पर (सेवानिवृत्त) धारा 92 के तहत राशि वसूली की कार्रवाई।
पंचायत समन्वयक : हेमारानी नाजगढ़ पर पद से पृथक किए जाने की कार्रवाई।
ब्लॉक समन्वयक स्वच्छ भारत अभियान - हेमारानी नाजगढ़ को निलंबित किए जाने की कार्रवाई।